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ब्रेव बडी’ से बच्चे बनेंगे ब्रेव

‘ब्रेव बडी’ से बच्चे बनेंगे ब्रेव

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मुंबई श्रीकेश चौबे:- छोटे बच्चों की सुरक्षा से संबंधित बढ़ती चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक नई पहल की है, जिसके अंतर्गत शिक्षकों को ‘ब्रेव बडी’ नामक नई शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें इसका प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 अक्टूबर से शुरू होकर 13 अक्टूबर तक लोअर परेल, गोरेगांव और कुर्ला स्थित बीएमसी स्कूलों में ‘टार्गेट लर्निंग वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा आयोजित किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में केवल सैद्धांतिक या किताबी ज्ञान पर ज़ोर देने के बजाय, शिक्षकों को ‘ब्रेव बडी’ के शिक्षण संसाधनों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया। इसके माध्यम से शिक्षकों में यह समझ विकसित हुई कि इन विभिन्न गतिविधियों को कक्षा के माहौल और बच्चों के विकास की आवश्यकताओं के अनुरूप कैसे ढाला और लागू किया जा सकता है।

9,000 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण
ब्रेव बडी नामक यह किट अनुभव और जिज्ञासा-आधारित सीखने की अनूठी प्रक्रिया है, जिसे स्कूली बच्चों को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने में मदद करने के लिए निर्मित किया गया है। इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए, ‘टार्गेट लर्निंग वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा बीएमसी स्कूलों के लगभग 9,000 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य शिक्षकों को कक्षाओं में ‘ब्रेव बडी’ नामक इस किट का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए तैयार करना है, ताकि वे 3 से 13 वर्ष तक के छात्रों को खेल-खेल में गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी बातों को सिखा सकें।

‘ब्रेव बडी’ किट मराठी और अंग्रेज़ी भाषा में उपलब्ध
‘ब्रेव बडी’ किट मराठी और अंग्रेज़ी भाषा में उपलब्ध है। इसमें 3 से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए उनकी उम्र के अनुसार सीखने की चार विशेष सामग्री-किट दी गई है। प्रत्येक किट बच्चों की उम्र, विकास के स्तर, अनुभवों और समझ को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। ये चारों किट बाल सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं पर आधारित हैं। इनमें बच्चों की शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक, डिजिटल और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है। इन किटों में विषयों को समझाने के लिए पुस्तकें, शिक्षकों के लिए मार्गदर्शिका, गतिविधियों की सामग्री, चित्रों के माध्यम से समझाने वाली सामग्री और अभ्यास-पत्र दिए गए हैं। इनकी मदद से शिक्षक कक्षा में बच्चों के साथ बातचीत और गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों को आसानी से समझा सकते हैं। शिक्षकों की मदद के लिए निर्देशात्मक वीडियो भी उपलब्ध हैं। इनसे शिक्षक सीख सकते हैं कि किट में दी गई सामग्री और खिलौनों का कक्षा में सबसे अच्छे तरीके से उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।

‘ब्रेव बडी’ से बच्चों को मिलेगा लाभ
कुर्ला के बीएमसी स्कूल में प्रशिक्षण लेने वाले एक शिक्षक ने कहा, “ब्रेव बडी किट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातें ऐसी गतिविधियों के माध्यम से सिखाई जाएँगी, जिन्हें बच्चे आसानी से समझ सकेंगे और अपने जीवन से जोड़ सकेंगे। इस प्रशिक्षण से हमें यह समझने में मदद मिली है कि इन सामग्रियों का उपयोग कैसे करना है। साथ ही, इन सामग्रियों के माध्यम से हम बच्चों से उन परिस्थितियों पर खुलकर बातचीत कर सकेंगे, जिनका सामना उन्हें रोज़मर्रा के जीवन में करना पड़ता है।” लोअर परेल में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में एक अन्य शिक्षिका ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “जब बच्चे केवल सुनने के बजाय गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो वे विषयों को आसानी से समझते हैं और उनसे जुड़ पाते हैं। ‘ब्रेव बडी’ की गतिविधियों से बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों पर चर्चा करने, उनमें सही तरीके से प्रतिक्रिया देने और अपनी सीख को मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है। इससे वे कक्षा में सीखी गई बातों का उपयोग वास्तविक जीवन में भी कर सकते हैं।”

बच्चों का बढ़ेगा आत्मविश्वास
‘टार्गेट लर्निंग वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के संस्थापक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप गंगारामानी ने कहा, “टार्गेट लर्निंग वेंचर्स में हमारा मानना है कि सीखना तभी सार्थक होता है, जब बच्चे सीखी हुई बातों को समझें, उनका अनुभव करें और उन्हें अपने जीवन में अपनाएँ। ‘ब्रेव बडी’ में बच्चों की उम्र के अनुसार तैयार की गई सामग्री और व्यावहारिक गतिविधियाँ शामिल हैं। ये बच्चों में जागरूकता, आत्मविश्वास और सुरक्षित विकल्प चुनने की समझ विकसित करने में मदद करती हैं। हम स्कूली बच्चों को सुरक्षा की व्यवस्थित शिक्षा देने की बीएमसी की इस पहल का स्वागत करते हैं। हमें खुशी है कि हम शिक्षकों को ऐसी सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वे सुरक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर बच्चों के साथ रोचक और प्रभावी ढंग से बातचीत कर सकें।”

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