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डेड मैन राजेश सराफ के अंगदान से बहाल हो जाएगी अब, जिंदगी की जद्दोजहद से जूझ रहे दिनेश चंद्र तिवारी की दुनिया

डेड मैन राजेश सराफ के अंगदान से बहाल हो जाएगी अब, जिंदगी की जद्दोजहद से जूझ रहे दिनेश चंद्र तिवारी की दुनिया

प्रदेश में पहली ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए जबलपुर से भोपाल तक 300 किलोमीटर
का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया

जबलपुर (उमा शंकर मिश्रा )
जबलपुर से रमेश शराफ के शरीर के अंगों को 313 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर सड़क मार्ग के द्वारा मेट्रो अस्पताल जबलपुर से राजधानी भोपाल स्थित बंसल अस्पताल तक बनाया गया. जबलपुर पुलिस ने मेट्रो अस्पताल से हेलीकॉप्टर तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया था, इसमें जबलपुर पुलिस अपनी अहम भूमिका निभाई और हर उस सड़क पर पुलिस बल तैनात किया, जहां से इस एंबुलेंस को ले जाना था.
पहले इस अंग को एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण इसे एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका, इसलिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।


भोपाल में प्राइवेट जॉब करने वाले 64 साल के राजेश सराफ को मार्च में ब्रेन हेमरेज हो गया थ. इसके बाद उनके परिवार के सदस्य उन्हें लेकर जबलपुर आ गए और दमोह नाका स्थित निजी अस्पताल में उनका इलाज शुरू करवाया गया. दो दिन पहले डॉक्टर्स ने परिजनों को बताया कि राजेश सराफ ब्रेन डेड हो गए हैं. इसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन ने परिजनों को उनके अंगदान करने की सलाह दी, जिससे किसी की जिंदगी बच सके.
अस्पताल के डॉक्टर्स की सलाह पर परिजन भी इसके लिए तैयार हो गए. इसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन ने नेशनल ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन यानी NOTTO की मदद से जरूरत मंद मरीज की तलाश शुरू की. इसके बाद पता चला कि भोपाल के निजी अस्पताल में भर्ती देवास निवासी दिनेश चंद्र तिवारी को किडनी, लीवर और आंखों के रेटीना की जरूरत है.

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