क्रीड़ा भारती काशी प्रांत ने खेल को ‘मौलिक अधिकार’ बनाने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

प्रयागराज: क्रीड़ा भारती काशी प्रांत की ओर से सर्किट हाउस में खेल को ‘मौलिक अधिकार’ बनाए जाने के संदर्भ में एक ज्ञापन माननीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव को सौंपा गया। यह ज्ञापन क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय बैठक में लिए गए संकल्पों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया गया है।
प्रमुख बिंदु:
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल: यह ज्ञापन क्रीड़ा भारती के प्रांत मंत्री वीरेंद्र नाथ उपाध्याय और अन्य पदाधिकारियों द्वारा सौंपा गया।
दस्तावेज़ की मुख्य बातें: संगठन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज़ में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘खेलने का अधिकार’ केवल कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों तक सीमित न होकर सभी के लिए होना चाहिए। खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने वाली एक समावेशी और खिलाड़ी-केंद्रित प्रणाली विकसित करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
नीति का समर्थन: दस्तावेज़ में केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई ‘खेलो भारत’ नीति के तहत खेल को सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण का साधन बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
ज्ञापन स्वीकार करते हुए माननीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने क्रीड़ा भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह क्रीड़ा भारती की एक अत्यंत सार्थक पहल है और खेल को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने का विषय एक महत्वपूर्ण एवं विचारणीय बिंदु है। इस अवसर पर क्रीड़ा भारती के अन्य पदाधिकारी उदय प्रताप सिंह, आरएस बेदी, अतुल सिद्धार्थ, श्यामसिंह, संजय श्रीवास्तव, अभय कुशवाहा, ज्योति प्रकाश, प्रोफेसर दीप्ति शुक्ला, अमृता प्रधान उपस्थित रहे।
