तेज़ आवाज़ में अज़ान देने पर मुअज़िन को जेल भेजा गया, लाउडस्पीकर जब्ब
मुंबई श्रीकेश चौबे:- शनिवार को बिजनौर
के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक नजीबाबाद में जन-सुनवाई के लिए जा रहे थे, तभी उन्होंने कथित तौर पर तेज आवाज में अजान सुनी। इसके बाद मस्जिद के मुअज्जिन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने मस्जिद का लाउडस्पीकर जब्त कर लिया और लापरवाही बरतने पर एक बीट कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया। इस घटना के बाद पूरे जिले में आदेश जारी किया गया कि सभी पुलिस स्टेशन यह कन्फर्म करते हुए हलफ़नामा जमा करें कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर तय शोर-शराबे की सीमा के अंदर ही बज रहे हैं। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ‘समाधान दिवस’ की सुनवाई के लिए जाते समय मोहल्ला मकबरा से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने कथित तौर पर बहुत तेज आवाज में अज्ञान सुनी।
बिश्नोई ने कोतवाली पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिसके बाद स्टेशन इंचार्ज अमित कुमार मलिक मस्जिद पहुँचे, लाउडस्पीकर जब्त किया और मुअज्जिन मोहम्मद फ़ैजान को हिरासत
में ले लिया और एफआईआर दर्ज कर लिया।
उन्होंने शांति भंग करने के आरोप में भी उसके खलिाफ़ कार्रवाई शुरू की, जिसके बाद सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसे जेल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने इलाके में शोर-शराबे से जुड़े नियमों को लागू न कर पाने के आरोप में बीट कॉन्स्टेबल ललित कुमार को सस्पेंड कर दिया। इस घटना के बाद, पुलिस ने बिजनौर के सभी स्टेशन इंचार्ज को निर्देश दिया कि वे अपने बीट कॉन्स्टेबलों के जरिए हलफ़नामा जमा करें और सर्टिफ़ाई करें कि उनके अधिकार क्षेत्र में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर तय सीमा के अंदर ही बज रहे हैं।
बता दें कि यह कार्रवाई सितंबर में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के खलाफ़ पूरे जिले में चलाए गए पुलिस अभियान के बाद की गई है। उस अभियान के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर 2,509 लाउडस्पीकर हटाए थे, जिनमें 1,323 मस्जिदों से, 1,116 मंदिरों से और 70 गुरुद्वारों से हटाए गए थे। धार्मिक संस्थानों को यह भी निर्देश दिया गया था कि वे सुनिश्चित करें कि बचे हुए लाउडस्पीकर तय शोर-शराबे की सीमा के अंदर ही बजें।

