इस देश में क्या हो रहा है?
समाजसेविका सौ पुष्पा रत्न पारखी
*जबकि प्रधानमंत्री और कैबिनेट से उम्मीद की जाती है कि वे लोगों को सुरक्षा देकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करें, यह सरकार का फ़र्ज़ है कि वह शांति से प्रोटेस्ट कर रहे लोगों की सुरक्षा करे।*
*लेकिन देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही देश के प्रोटेस्ट करने वालों को दुश्मन समझ रहे हैं और उन पर बेरहम और भयानक ज़ुल्म कर रहे हैं।

मुंबई श्रीकेश चौबे:-
देश में पहली बार, दिल्ली पुलिस और BJP-संघ के गुंडे मिलकर प्रोटेस्ट करने वालों, खासकर स्टूडेंट्स, महिलाओं और जवान लड़कियों को टारगेट कर रहे हैं, उनके साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं, उन्हें पीट रहे हैं और पुलिस की गाड़ियों में ले जा रहे हैं।
इस तरह से शांति से प्रोटेस्ट करने वालों पर हिंसा करना गैर-कानूनी है, और अब पुलिस के सामने ही कारों से लाठी-डंडे उतारकर जंतर-मंतर मैदान में लाए जा रहे हैं। पुलिस एक भी शब्द कहने को तैयार नहीं है।
इस शांति पसंद देश में क्या हो रहा है!
पत्रकारों की रिपोर्ट के मुताबिक, कहा जा रहा है कि तिहाड़ और दूसरी जेलों के खतरनाक कैदियों को विरोध को कुचलने के लिए जंतर-मंतर मैदान में लाया गया है।
देश के वोटरों के हक से खेलने वाले चीफ इलेक्शन कमिश्नर श्री ज्ञानेश कुमार (गुप्ता) ने BJP को सत्ता में बनाए रखने के लिए जो साज़िश की है और सत्ता पाने की कोशिश की है, वह देश के डेमोक्रेसी और संविधान को खत्म करने वाली घटना है।
इसके खिलाफ देश के युवाओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में विरोध शुरू कर दिया है। इस विरोध का शांति से सामना करने के बजाय, मोदी-शाह हिंसा का सहारा लेकर इस विरोध को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अगर देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री विरोध को हिंसक मोड़ दे रहे हैं, तो यह बहुत खतरनाक और भयानक है। वे खुद देश में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और अशांति और दंगे भड़काने का काम कर रहे हैं।
क्या इस जोड़ी ने वोट चुराकर मिली सत्ता हाथ से न जाए, इसके लिए नरसंहार करने का फैसला किया है? क्योंकि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा लेने के बजाय, जनता मोदी-शाह पर देश में दंगे जैसे हालात बनाने का आरोप लगा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह को पता होना चाहिए कि अगर दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में खुलेआम लाठी-डंडे चले, तो जनता तलवारें और खंजर लेकर बाहर आ जाएगी। ध्यान रहे कि इसका समर्थन करने वाली दिल्ली पुलिस भी उतनी ही ज़िम्मेदार होगी।
जहां सुप्रीम कोर्ट का दखल देना ज़रूरी है, वहीं चीफ जस्टिस सूर्यकांत भी इस विनाशकारी हालात के लिए ज़िम्मेदार होंगे। जनता इस राय पर आ गई है कि संविधान और न्यायपालिका अपने स्वायत्त कर्तव्यों को छोड़कर देश में अशांति और विनाश के लिए अनुकूल हालात बनाने में मदद कर रहे हैं।

