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*आयुर्वेद अनुसंधान को नई दिशा: शोध उपकरणों के विकास एवं प्रमाणीकरण पर राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रमाणपत्र कार्यक्रम का शुभारंभ

*आयुर्वेद अनुसंधान को नई दिशा: शोध उपकरणों के विकास एवं प्रमाणीकरण पर राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रमाणपत्र कार्यक्रम का शुभारंभ*


15 अक्टूबर 2026: आयुर्वेद में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयुर्वेद टूल डेवलपमेंट, वैलिडेशन एवं एविडेंस आर्किटेक्चर विषयक एक माह के ऑनलाइन प्रमाणपत्र कार्यक्रम का 15 अक्टूबर 2026 को महर्षि चरक आयुर्वेद अनुसंधान एवं विकास योजना के अंतर्गत सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन राष्ट्रीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, हिसार तथा प्रायौगिक साँख्यिकी सँस्थान, कानपुर के संयुक्त जिला प्रशिक्षण केंद्र द्वारा केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है।

समारोह में प्रो. (वैद्य) के. राम चंद्र रेड्डी, कुलपति, महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, तथा प्रो. तनुजा मनोज नेसरी, निदेशक, आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, जामनगर, विशिष्ट अतिथि रहे। प्रो. (डॉ.) जी. एस. तोमर, निदेशक, आयुष अनुसंधान, प्रायौगिक साँख्यिकी सँस्थान, कानपुर एवं योजना के अध्यक्ष, अतिथि-विशेष के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह का प्रारंभ धन्वंतरि वंदना से हुआ। डॉ. शुभम पांडेय, परियोजना निदेशक, ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। प्रो. (डॉ.) सीमा द्विवेदी, राष्ट्रीय समन्वयक, ने संयुक्त जिला प्रशिक्षण केंद्र एवं दोनों संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों का परिचय दिया, जबकि डॉ. त्रिभुवन पारीक, प्राचार्य, राष्ट्रीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, हिसार, ने कार्यक्रम की विषयवस्तु एवं आयुर्वेद अनुसंधान में शोध उपकरणों के विकास, प्रमाणीकरण और वैज्ञानिक साक्ष्य निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि प्रो. (वैद्य) के. राम चंद्र रेड्डी ने आयुष क्षेत्र में ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने आयुष में विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करने के लिए संस्थानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. तनुजा मनोज नेसरी ने प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति को शुभकामनाएँ दीं। प्रो. (डॉ.) जी. एस. तोमर ने आयुष अनुसंधान में शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता रेखांकित की। डॉ. ज्योति रानी, प्रशासक, राष्ट्रीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, हिसार, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

श्री कृष्ण कुमार दुहन, निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, हिसार, कार्यक्रम के संरक्षक हैं। अधिवक्ता अक्षय दुहन एवं डॉ. त्रिभुवन पारीक सह-संरक्षक हैं। डॉ. अंकित कुमार आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक एवं समझौता ज्ञापन तथा सहयोग प्रकोष्ठ के संयोजक हैं। प्रायौगिक साँख्यिकी सँस्थान, कानपुर के आईटी प्रमुख एवं अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ प्रभारी इंजी. अमित तिवारी कार्यक्रम के आयोजन सचिव रहे तथा उन्होंने उद्घाटन समारोह का समन्वय एवं संचालन किया। डॉ. सहाना वी.एम. वत्स एवं डॉ. सुनील कुमार क्रमशः जिला-स्तरीय एवं अनुसंधान समन्वय में योगदान दे रहे हैं।

एक माह तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य शोध उपकरणों के विकास, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, अनुसंधान पद्धतियों एवं साक्ष्य निर्माण में प्रतिभागियों की दक्षता बढ़ाना है। आयुर्वेद के विषयगत ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों एवं सांख्यिकीय विज्ञान से जोड़कर यह पहल आयुर्वेद में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्य तथा प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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