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तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना से गूँजे देवालय, उमड़े श्रद्धालु

तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना से गूँजे देवालय, उमड़े श्रद्धालु

 


उजाला शिखर

 

​हरदोई मे शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। जिलेभर के प्रमुख देवी मंदिरों और घरों में माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा, विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ की जा रही है। तीसरे दिन का यह पर्व भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।​मंदिरों में उमड़ी भीड़ और गूंजे जयकारे ​हरदोई जिला मुख्यालय समेत कछौना, पिहानी, बेनीगंज, बिलग्राम, सांडी और शाहाबाद के प्राचीन व प्रसिद्ध देवी मंदिरों में अहले सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है। ढोल-नगाड़ों, घंट-घड़ियालों की गूंज और “जय माता दी” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालु माँ के दरबार में पहुंचकर नारियल, चुनरी, फल और मिष्ठान अर्पित कर रहे हैं।
​माँ चंद्रघंटा के स्वरूप का महत्व और मान्यता
​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ दुर्गा का यह तीसरा स्वरूप अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी है।माता के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।​साहस और शांति की प्रतीक: सिंह पर सवार और दस भुजाओं वाली माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप भक्तों को आंतरिक शक्ति, साहस, शौर्य और भय से मुक्ति प्रदान करता है ​मान्यता है कि इनकी सच्चे मन से आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
​विशेष अनुष्ठान और सांस्कृतिक आयोजन
​हरदोई के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थापित दुर्गा पंडालों में सुबह-शाम विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर दुर्गा सप्तशती के पाठ, सामूहिक सुंदरकांड और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तीसरे दिन माता को दूध और दूध से बनी खीर या मिष्ठान का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा के साथ निभाया। पुलिस प्रशासन द्वारा भी मेलों और भीड़भाड़ वाले मंदिरों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन कर सकें।

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