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रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त लेखपाल-कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की मांग

रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त लेखपाल-कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की मांग

कानूनगो और लेखपाल की मनमानी से जनता त्रस्त!

स्थगन आदेश के बावजूद हल्का लेखपाल एवं कानूनगो दिखा रहा है ठेंगा!

हाईकोर्ट, डीएम, एसडीएम, दीवानी कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी लेखपाल – कानूनगो मनमानी पर उतारू

न्यायालय एवं अधिकारियों को गुमराह कर रहा है हल्का लेखपाल एवं कानूनगो!

फरेब एवं जालसाजी के बल पर स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी चकमा दे रहा है हल्का लेखपाल एवं कानूनगो!

विशेष संवाददाता

भदोही। संयम भारत। जनपद में एक कानूनगो और लेखपाल की मनमानी के कारण क्षेत्र में भारी प्रशासनिक अव्यवस्था उत्पन्न हो रही है। कानूनगो और लेखपाल की मनमानी के कारण जनता त्रस्त है और लोगों में त्राहि त्राहि मची हुई है। उनके भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की वजह से सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
बताना है कि ग्राम सभा इटहरा, कोनिया, ज्ञानपुर भदोही का लेखपाल सर्वेश शुक्ला एवं कानूनगो इन्दु तिवारी कानून को इस तरह धता बता रहा है कि कानून का राज खत्म हो गया है। उसके जालफेरे का कानून चल रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि ग्राम इटहरा, थाना कोईरौना, जनपद भदोही के पीड़ित/ भुक्तभोगी शारदा प्रसाद तिवारी आदि के द्वारा मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक मुकदमा सं. 19920/1999 गुलाब धर आदि बनाम डी.डी.सी. से दाखिल किया गया, जिसमें मा. उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश पारित किया, उक्त मुकदमे के वादी गुलाबधर की मृत्यु के बाद वादी पक्ष से शारदा प्रसाद की तरफ से रेस्टोरेशन दाखिल किया गया जो उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद इन दोनों के सह पर उसी जमीन के संबंध में पीड़ित के विपक्षीयों ने उच्च न्यायालय के मुकदमे के तथ्य को छिपा करके एक सिविल मुकदमा SDM ज्ञानपुर के यहां सावित्री देवी बनाम सरकार दाखिल किया। जिसकी जानकारी मिलने पर पीड़ितों ने उसमें उपस्थित होकर जवाब लगाया, जो आज भी विचाराधीन है। जब इन फरेबियों का इसमें योजना सिद्ध नहीं हो पाया तो इन फरेबियों ने पुनः उपरोक्त दोनों मुकदमो को छुपा करके एक और मुकदमा SDM ज्ञानपुर के यहां ही अनिल बनाम सरकार दाखिल करके और अपने खड्यंत्र के बल पर एक पक्षीय पैमाइश का आदेश प्राप्त कर लिया। भुक्तभोगियों को जब इसकी जानकारी मिली तो यहां भी उपस्थित होकर के उपरोक्त सारी जानकारी दिया, इसके बावजूद भी हल्का लेखपाल, कानूनगो कुचक्र रचता रहा, जिसकी जानकारी मिलने पर पीड़ित पक्षों ने उपरोक्त सभी इन खड्यंत्रकारी शक्तियों की विरुद्ध जिलाधिकारी के यहां एक वाद प्रस्तुत किया, जिसमें जिलाधिकारी, भदोही ने भी रोक लगा दिया था, इसी बीच परेशान लोगों ने जनपद न्यायालय में एक दीवानी वाद शारदा प्रसाद बनाम अनिल कुमार आदि दायर किया, जिसमें न्यायालय ने पीड़ित पक्षों के पक्ष में एक आदेश पारित किया।
पीड़ित पक्षों ने बताया कि जिसके बावजूद भी कानून से ऊपर हो करके हल्का लेखपाल एवं कानूनगो बोए खेत की पैमाइश करने पर उतारू हैं, और यह कहते है कि मैं जो चाहता हूं, करता हूं, सब मेरी जेब में रहते हैं, भुक्तभोगियों का यह भी कहना है कि ये आए दिन पुलिस प्रशासन के साथ आकर धमकी देता है कि जो मैं कहूं मान लो अन्यथा महंगा पड़ेगा, हमारे बल को तुमने यह भी देखा होगा कि मैंने तुम्हारे विपक्षीगणो में से सिर्फ 1-2 लोगों को ही और तुम्हारी तरफ से दर्जनों लोगों को धारा 126/135 B.N.S.S. में फंसवा दिया, वास्तव में उपरोक्त भुक्तभोगियों के बताने एवं उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखा जाए तो स्पष्ट रूप से लगता है कि उपरोक्त हल्का लेखपाल एवं कानूनगो हाईकोर्ट एवं न्यायालय से बड़े दिखाई दे रहे हैं। खैर बड़ा-बड़ा होता है छोटा-छोटा होता है, अब देखना है वास्तव में क्या बड़ा अपने को बड़ा साबित कर पायेंगे कि यही लेखपाल व कानूनगो सब पर भारी रहेंगे।
सूत्रों से यह भी जानकारी प्राप्त हुआ है कि इस लेखपाल एवं कानूनगो इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करने का गिरोह है कि जिस भैरव लाल के पक्ष में काम कर रहा है उसका मकान भी अपने सह पर ग्राम सभा एवं वन विभाग की जमीन पर बनवा दिया है, इसी तरह इसके गैंग में कुछ ऐसे लोग है जो बिना बैनामा के ग्रामसभा, ग्राम समाज एवं गरीबों की जमीन को कानून का धता बता करके इस्तेमाल कर रहे हैं और बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाएं है
भुक्तभोगियों द्वारा यह भी बताया गया है कि इन जालसाजीयों का इतना बड़ा गैंग है वो कहते है कि मेरी बात नहीं मानोगे तो हम तुम्हारे रकबे में दूसरे का नाम भी दर्ज कर देंगे। पीड़ित पक्ष का यह कहना है कि इनका इस सेक्टर में जो मूल चक बना हुआ है, इनकी जो भी जमीन हो अपने चक से सटे चक में ले यही चकबंदी नियमावली है और इसीलिए चकबंदी होती भी है, लेकिन इन फरेबियों ने अपना एक नियम कानून बना करके एक सेक्टर में नाच नाच के चक हर कॉर्नर पर लेना चाहते हैं। पिड़ित पक्ष ने बताया कि इन दोनों भ्रष्टाचारी कर्मचारी एवं विपक्षी का कॉल डिटेल्स निकलवा कर जांच किया जाए तो इस घटना में गलत कार्य करने वाले लोगों का चेहरा सामने आ जाएगा, इसी तरह के कर्मचारियों की वजह से जनपद देवरिया, प्रयागराज के प्रतापपुर में जिस प्रकार से घटनाएं हुई है, उसके जिम्मेदार इसी तरह से कार्य करने वाले लोग हैं।
यह समाचार उन गंभीर और संवेदनशील मुद्दों को सामने लाता है, जिनका सामना स्थानीय लोग कर रहे हैं। लेखपाल और कानूनगो की मनमानी से यह साबित होता है कि जब तक सख्त कानूनी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक कानून के राज की वापसी मुश्किल है। इसके लिए प्रशासन और न्यायपालिका की जिम्मेदारी बनती है कि वे भ्रष्टाचार और कानून के उल्लंघन के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करें, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले।

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