रानी रेवती देवी में संस्कृति बोध परियोजना की बैठक का आयोजन,भारत माता के स्वरूप पर हुआ चिंतन

प्रयागराज।* रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर, प्रयागराज में प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह के संयोजन में विद्या भारती की महत्वाकांक्षी संस्कृति बोध परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में क्षेत्रीय अभियान प्रमुख राजेन्द्र देव त्रिपाठी ने महानगर के समस्त प्रधानाचार्य एवं संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत हम सब भारतवासियों की माता है। यह एक भूखंड मात्र नहीं, जगज्जननी के रूप में हम सब इसकी आराधना करते हैं।”
उन्होंने कहा कि –
> यह कंकड़ पत्थर रेत नहीं, यह तो माता है माता है।”
भारत के प्राचीन स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का मानचित्र पहले से छोटा हो गया है। कभी उत्तर में कैलाश-मानसरोवर, नेपाल, भूटान, तिब्बत तक, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान (गांधार देश) तक, पूर्व में ब्रह्मदेश (म्यांमार), दक्षिण में सिंहल द्वीप (श्रीलंका) तक भारत की सीमाएं थीं। पाकिस्तान और बांग्लादेश तो 1947 तक भारत के ही अभिन्न अंग थे।
उन्होंने संस्कृति बोध के महत्व को बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक सीमाओं का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर महानगर के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं संस्कृति बोध परियोजना के प्रमुखों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया।
