अंडर-23 मंडलीय चयन में अनियमितता के आरोप,
प्रतिभावान खिलाड़ियों को नजरअंदाज करने का आरोप
2025-26 की अंडर-14 लीग में विवादित मैच को लेकर भी एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन की अंडर-23 मंडलीय टीम के चयन को लेकर क्रिकेट क्लबों और एकेडमियों में असंतोष सामने आया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को भेजी गई मंडल स्तर के चयनित खिलाड़ियों की सूची में कई ऐसे प्रतिभावान क्रिकेटरों के नाम नहीं हैं, जो अपने प्रदर्शन के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कुछ खिलाड़ियों को चयन में नजरअंदाज किए जाने से क्लबों और एकेडमी संचालकों में रोष है। विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि एक ऐसे खिलाड़ी को चयन से बाहर रखा गया, जो पिछले वर्ष बीसीसीआई की अंडर-23 ट्रॉफी की उपविजेता उत्तर प्रदेश टीम का सदस्य रह चुका है।
क्लब संचालकों द्वारा उठाए गए सवालों में सिद्धार्थ मिश्रा का नाम प्रमुखता से शामिल है। विज्ञप्ति में उन्हें पिछले वर्ष की बीसीसीआई अंडर-23 ट्रॉफी की उपविजेता यूपी टीम का सदस्य और बाएं हाथ का बल्लेबाज बताया गया है। इसी तरह विशाल यादव के चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि वह पिछले दिनों आयोजित यूपी स्पीड टैलेंट हंट में तेज गेंदबाज के रूप में चयनित हुए थे।
इसके अलावा चौधरी नौनिहाल सिंह क्रिकेट क्लब से जुड़े तेजस्व मिश्रा, 25 विकेट लेने वाले ऑफ स्पिनर अंकित सिंह तथा स्पिनर आशुतोष पांडेय जैसे खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। क्लबों का कहना है कि चयन के दौरान खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन और पिछले रिकॉर्ड को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
चयन समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में एसोसिएशन के संयुक्त संयोजक मंडल क्रिकेट एल.बी. काला तथा चयन प्रक्रिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। विज्ञप्ति में उनके संबंध में कई आरोप लगाए गए हैं और चयन प्रक्रिया में कथित मनमानी तथा मिलीभगत की बात कही गई है।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित पदाधिकारियों अथवा इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन का पक्ष प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।
अंडर-14 लीग के विवादित मैच का भी उठाया मुद्दा
क्रिकेट क्लबों ने एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 2025-26 की अंडर-14 लीग प्रतियोगिता में लड़कों और लड़कियों की टीम के बीच खेले गए एक मैच का भी उल्लेख किया है।
प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि उक्त मैच के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच जमकर विवाद और मारपीट हुई तथा लड़के और लड़कियों दोनों की ओर से कथित रूप से अमर्यादित एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। क्लब संचालकों का आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से मामले में चुप्पी साध ली गई और किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि उक्त घटना में शामिल एक टीम का खिलाड़ी एसोसिएशन से जुड़े एक कोच का बेटा था। इसी कारण क्लब संचालकों ने घटना पर एसोसिएशन की कथित निष्क्रियता को लेकर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में भी संबंधित एसोसिएशन या कोच का स्वतंत्र पक्ष प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज नहीं है।
पारदर्शी चयन और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
विभिन्न क्रिकेट क्लबों एवं एकेडमियों के संचालकों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि एसोसिएशन के कुछ कर्ताधर्ताओं की कथित मनमानी और अदूरदर्शिता के कारण खिलाड़ियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
क्लब संचालकों ने मांग की है कि अंडर-23 सहित सभी आयु वर्गों की चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रदर्शन आधारित बनाया जाए। साथ ही खिलाड़ियों के चयन के स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक किए जाएं तथा प्रतियोगिताओं के दौरान अनुशासनहीनता या विवाद की घटनाओं में बिना किसी भेदभाव के नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्रिकेट क्लबों का कहना है कि एसोसिएशन की जिम्मेदारी केवल टीमों का चयन और प्रतियोगिताओं का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को सुरक्षित, अनुशासित और समान अवसर वाला खेल वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
