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धन्वंतरि जयंती समारोह में इंटीग्रेटेड मेडिसिन को बताया समय की जरूरत

 

धन्वंतरि जयंती समारोह में इंटीग्रेटेड मेडिसिन को बताया समय की जरूरत

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

प्रयागराज। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), प्रयागराज एवं आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में होटल ब्लू डायमंड, सिविल लाइंस में भगवान धन्वंतरि जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सकों एवं गणमान्य लोगों ने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए इंटीग्रेटेड मेडिसिन को रोगी हित में महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद राधाकान्त ओझा तथा विशिष्ट अतिथियों में बांदा के पूर्व सांसद रमेश चंद्र द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय हंडिया के प्राचार्य प्रो. केदारनाथ और क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. नवीन सोनी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जी.एस. तोमर ने की।

स्वागत भाषण में नीमा प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. भरत नायक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नीमा के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को एक मंच पर लाकर समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना है। नीमा उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव
डॉ. अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा व्यवस्था को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित रखने के बजाय रोगी की समग्र आवश्यकताओं को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा एवं अन्य चिकित्सा पद्धतियों के प्रमाणित और उपयोगी पक्षों का समन्वित उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बना सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ. राधाकान्त ओझा ने भगवान धन्वंतरि को भारतीय चिकित्सा परंपरा का प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि भारत की चिकित्सा विरासत अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने आयुर्वेद के ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आगे बढ़ाने तथा चिकित्सा सेवा में संवेदनशीलता और सेवा भावना को प्राथमिकता देने की बात कही।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. (डॉ.) जी.एस. तोमर ने भगवान धन्वन्तरि को स्वास्थ्य का देवता बताते हुए कहा कि उनका जन्मोत्सव हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन वर्ष 2002 में कोच्चि में आरोग्य भारती की स्थापना हुई थी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत यह स्वयंसेवी संगठन आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सभी प्रांतों में सेवा कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटीग्रेटेड मेडिसिन का उद्देश्य चिकित्सा पद्धतियों को एक-दूसरे में विलीन करना नहीं, बल्कि रोगी की आवश्यकता के अनुसार उनके प्रमाणित एवं उपयोगी पक्षों का समन्वित उपयोग करना है।उन्होंने कहा कि संगठन इंटीग्रेटिव हेल्थ केयर एवं ‘वन नेशन, वन हेल्थ’ की अवधारणा को साकार करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने चिकित्सा पद्धतियों के आपसी समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों को प्रतिस्पर्धा के बजाय परस्पर पूरक की भावना से मिलकर कार्य करना चाहिए।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि आयुर्वेद स्वास्थ्य संरक्षण, जीवनशैली प्रबंधन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार समन्वय से रोगियों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

प्रो. केदारनाथ ने आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। उन्होंने आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और जीवनशैली को स्वस्थ जीवन का आधार बताया।

डॉ. नवीन सोनी ने आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने और आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक पक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने धन्वंतरि जयंती को राष्ट्रीय स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाए जाने का पक्ष रखा।
पूर्व सांसद श रमेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ रही है। इनके वैज्ञानिक अध्ययन एवं अनुसंधान को और गति देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. सपना मिश्रा, डॉ. एस बी यादव, डॉ.सईद अहमद, डॉ. गौरव कुमार सिंह, डॉ. ओ.पी. मिश्रा, डॉ. भारत नायक, डॉ निशांत राय, डॉ. सीमा सिंह, डॉ.रेखा सिंह, डॉ.खुर्शीद, डॉ. निजाम सिद्दीकी, वैद्य एस के राय, डॉ अवनीश पांडेय, डॉ टीवी सिद्दीकी को सम्मानित किया गया।

अंत में डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवनीश पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर डॉ. ए एन मिश्रा, डॉ वीबी मिश्रा, डॉ वेद मिश्रा, डॉ. एमडी दुबे, डॉ.सुधांशु उपाध्याय, डॉ अवधेश त्रिपाठी, डॉ बी एस रघुवंशी, डॉ संतोष दुबे, डॉ अजय गोविंद राव, डॉ ऋतु कपूर, डॉ एस बी यादव, डॉ. सुमन मिश्रा, डॉ. अनीता सिंह मौजूद रहे।

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