अक्षय पुण्य की प्राप्ति को संगम में लगी पुण्य की डुपकी, श्रद्धालुओं ने किया दान पुण्य

प्रयागराज के संगम तट पर अक्षय तृतीया के मौके पर स्नान करने के लिए श्रद्धालु सुबह से पहुंचकर स्नान कर रहे हैं। गंगा यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी की धारा में स्नान किया और दान पुन्य कर अक्षय पुण्य की प्राप्ति की ।

पौराणिक मान्यता है, की संगम में डुबकी लगाने के बाद तट पर स्थित अक्षय वट के नीचे पूजा अर्चना करने से जो पुण्य फल अर्जित होता है जो कभी ख़त्म नहीं होता । श्रद्धालु विष्णु के अवतार वेणी माधव के दर्शन करने के बाद अक्षय वट के नीचे आराधना पूजा कर अपना पुरुषार्थ अच्छा बना रहे हैं |

मान्यता यह भी है की स्रष्टि के नष्ट होने के बाद आई प्रलय में भगवान विष्णु बालमुकुन्द का रूप धारण कर बाल रूप में एक पीपल के पत्ते में लेटकर जल में विचरण करते हैं। उस समय यही अक्षय वट उनका अंश बनकर उन्हें छाया प्रदान करता है । यह वृक्ष अक्षय है और इसी वजह से इसके नीचे अर्जित किया हुआ पुण्य भी कभी क्षय नहीं होता |

अक्षय तृतीया के संयोग से जो पुण्य अर्जित होगा वह संगम में स्नान कर अक्षय वट के नीचे आराधना पूजा करने से हमेशा के लिए संचित हो जायेगा ऐसी मान्यता है।

प्रयागराज में सुबह से ही श्रद्धालु संगम तक पहुंचकर आस्थाकी डुबकी लगाने लगने के बाद विधि विधान से पूजा पाठकर रहे हैं। पूजा अर्चना के बाद दान का भी कर रहे है। ऐसा कहा जाता कि अक्षय तृतीया पर सोना चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
