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*पौधों के समूह कार्बन डाइ ऑक्साइड लेकर वनऑक्सीजन छोड़कर पर्यावरण को सर्वोत्तम तरीके से संतुलित करते हैं – डॉ आदि नाथ*

  • *पौधों के समूह कार्बन डाइ ऑक्साइड लेकर वनऑक्सीजन छोड़कर पर्यावरण को सर्वोत्तम तरीके से संतुलित करते हैं – डॉ आदि नाथ*

पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के जमुनीपुर कैंपस में मरुभूमिकरण को रोकने,जल संग्रहण को संतुलित करने व पर्यावरण को स्वस्थ रखने हेतु, मालकागनी,ज्योतिषमती,रीठा, कल्पवृक्ष,सतावरी,सीता अशोक, व अशोक के पादप का रोपण किया गया,नेहरु ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय,वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 आदिनाथ के अनुसार अगर वैश्विक तापमान में वृद्धि 2 डिग्री सेल्सियस से वढ़कर 4 डिग्री सेल्सियस पहुँच जाती है तो मानव जीवन पर इसका क्या असर होगा ? अत्यधिक गर्मी होगी,वारिस में ऋतुवत्‌ बदलाव आयेगा,सूखा पड़ेगा,भूजल स्तर घटेगा,ग्लेशियर का पिघलाव होगा,समुद्र जल स्तर में वृद्धि होगी,कृषि एवंखाद्य सुरक्षा विनिष्ट होगी,उर्जा सुरक्षा खतरा बढ़ेगा, स्वास्थ्य प्रभावित होगा, जीव-विविधता में जाति-समूहों की संख्या में वृद्धि होती है,तो उनमें वातावरण में उपलब्ध संसाधनों की सर्वोत्तम ढंग से उपयोग करने की क्षमता होती है,जैव-विविधिता पर जाति – समूहों का प्रभाव के आधार पर निष्कर्ष स्वरुप यह देखा गया कि समूहों में प्रभावी जाति संसाधनों के सर्वोत्तम ढंग से उपयोग करके प्रभाव – आकार में भी वृद्धि हो जाती है,तथा मिट्टी की स्वास्थ्य स्थिर बना रहता है,इस पौधों के जैवभार का उपयोग जैवईधन (बायोफ्यूल), जैव ऊर्जा (बायोइनर्जी) बायो-इथेलॉल,बायो हाइड़ोजन एवं बायोचार उतपादन में किया जाता है,इस प्रकार वनस्पति प्रवर्धन में वैश्विक उष्णन (ग्लोबल-वार्मिंग) कारक गैस कार्बनडाई ऑक्साइड को लेकर क्लोरोफिल एवं सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति लेकर कार्बोहाइड्रेट (जीवभोजन) के उत्पादन की क्षमता प्रकाश – संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा होती है तथा जीवभार उत्पादकता बढ़ने के पश्चात्‌ निष्कर्ष स्वरुप समूह संवर्धन से प्राप्त यौगिक तथा रासायनिक तत्वों के उपयोग को कम करके बढ़ते वैश्विक ताप को सर्वोत्तम ढंग से नियंत्रित करके हानिकारक विकिरण से बचाकर कार्बन स्थिरीकरण करते हैं,इतना ही नहीं इस पेड़ों के जीवभार के उपयोग के द्वारा ऊसर भूमि (अनुत्पादक मृदा) के पी0एच0 को .2 से 6.8 तक पहुँचाकर उर्वरा भूमि (फर्टाइल लैण्ड) में बदलकर कृषि की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है,अतः पेड़ों की परत से लगातार प्रयागराज के गंगा के तराई क्षेत्र क्षय हो रही उत्पादकता को रोककर वर्षा को नियंत्रित किया जायेगा,इस दौरान डॉ रत्न कुमार पाण्डेय,डॉ आदि नाथ,श्री मिथिलेश पाण्डेय,श्री उमेश मिश्रा,श्री अंशुमान दुबे, बब्बूपुष्पाकर,ऋषिराज,राजीव पाण्डेय,अमन त्रिपाठी इत्यादि उपस्थित रहे।

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