ब्वॉयज हाईस्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डेविड लूक की फर्जी मार्कशीट के आरोप में पुलिस आयुक्त को दिया गया प्रार्थना पत्र

“जांच अधिकारी को निर्देशित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग”
*कुलदीप शुक्ला*
*उजाला शिखर*
*प्रयागराज।* ब्वॉयज हाईस्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डेविड लूक की फर्जी मार्कशीट के जांच के संदर्भ में पुलिस आयुक्त तहरीर दी गई। मॉरिस एडगर दान बिशप डायसिस ऑफ लखनऊ चर्च आफ नॉर्थ इंडिया 25 , महात्मा गांधी मार्ग सिविल लाइन प्रयागराज ने पुलिस आयुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र में जांच में इन तथ्यों को भी शामिल करने हेतु, साथ ही यदि मूल प्रपत्र की फोरेंसिक लैब से जांच की जरूरत हो तो उसे भी सील बंद लिफाफे में लेने हेतु संबंधित जांच अधिकारी को निर्देशित करने की मांग की है।
*उल्लेखनीय है कि* बिशप डायसिस ऑफ लखनऊ चर्च आफ नॉर्थ इंडिया के पद पर है और वर्ष 2010 में डेविड लुक को ब्वॉयज़ हाई स्कूल का कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया था। उसके पश्चात वर्ष 2012 में ब्वॉयज़ हाई स्कूल के प्रधानाचार्य के पद का विज्ञापन कराया था जिसमें डेविड लुक समेत कई अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। जिन में सभी अभ्यर्थियों ने अपने सभी प्रमाण पत्रों को सेल्फ अटेस्ट करके जमा किया था। जिन में से एक डेविड लुक भी थे जिनके समस्त अभिलेख स्वप्रमाणित करके अपने हस्ताक्षर द्वारा जमा किए गए थे। जिसकी मूल प्रति प्रार्थी के पास मौजूद है जिसमें डेविड लूक के ओरिजिनल हस्ताक्षर हैं और सेल्फ अटेस्टेड भी उन्हीं के द्वारा लिखा गया है।
जांच में आवश्यकता पड़ने पर मूल प्रति उपलब्ध करा दूंगा जिसकी फॉरेंसिक लैब से जांच में सब कुछ स्वतः प्रमाणित हो जाएगा कि डेविड लुक ने वर्ष 2007 की जो अंक तालिका छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर से रोल नंबर 361222 के द्वारा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है उसे डेविड लुक ने ही प्रस्तुत की थी। साथ ही यह भी अवगत कराना है कि वर्ष 2012 में ब्वॉयज़ हाई स्कूल के प्रधानाचार्य पद हेतु बनी साक्षात्कार समिति जिसमे पांच सदस्य थे जिसमें प्रार्थी अध्यक्ष था और इविग क्रिश्चियन कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉक्टर मार्विन भैंसी, पूर्व प्रधानाचार्य डॉक्टर एस . डी . चंद , क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रधानाचार्य आर. के . चत्री एवं इलाहाबाद स्कूल समिति के तत्कालीन सचिव एच . आर . मल थे।जब साक्षात्कार समिति साक्षात्कार हेतु बैठी तो अभ्यर्थियों का जो शैक्षणिक चार्ट बना तो उसमें सभी अभ्यर्थियों का पूर्ण शैक्षणिक विवरण दर्शाया गया था जिसके नीचे चयन समिति के पांचो सदस्यों का हस्ताक्षर था उक्त चार्ट में भी डेविड लुक द्वारा वर्ष 2007 में अंग्रेजी विषय से छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से एम . ए . उत्तीर्ण होना दिखाया गया है जिसकी छाया प्रति भी संलग्न की जा रही है । इस प्रकार डेविड लुक का यह कहना कि उक्त मार्कशीट उनकी नहीं है सरासर झूठ एवं धोखा है डेविड लूक एक जालसाज किस्म का आदमी है जो लगातार झूठ बोल रहा है और अभी तक हर जगह यही बोल रहा है कि उक्त मार्कशीट उसकी नही है जबकि किसी भी मंच पर वह अपनी एम . ए . की किसी भी अंक तालिका का विवरण नहीं दे रहा है जिससे वह अपने को खुद पास बता रहा है। इतना ही नहीं डेविड लूक ने अपनी जो बी.एड. की अंक तालिका दिखाई है उसमें वह संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में उत्तीर्ण होना दिखाया है।
जबकि उसने बॉयज हाई स्कूल से कभी भी उक्त बी . एड . का कोर्स करने के लिए छुट्टी नहीं ली है जिस सत्र में उसने बी . एड की परीक्षा उत्तीर्ण होना दिखाया है उस वर्ष वह लगातार विद्यालय में उपस्थित रहा और अपना हस्ताक्षर किया है और उस कार्यकाल का वेतन भी अपने खाते में आहरित किया है। डेविड लुक ने अपनी नौकरी के साथ साथ बी.एड. के संस्था परीक्षार्थी के रूप में पढ़ाई और उत्तीर्ण होना भी दिखाया है। जो कि कूट रचना एव जालसाजी की ओर इशारा करता है। डेविड लुक ने जो भी फर्जी अंकतालिका कूट रचना एवं जालसाजी के द्वारा बनवाई है इसमें इसके बड़े बेटे एवं उसके दोस्त की मिलीभगत और साजिश से ही उक्त अंक तालिका निर्मित कराई गई है और उसी के आधार पर डेविड लूक अभी तक नौकरी करता चला रहा है आश्चर्य की बात है कि डेविड लुक ने प्रधानाचार्य बनने के लिए अपने अनुभव में यह दिखाया है कि वह विगत दस वर्षों से लेक्चरर के रूप में विद्यालय में पढ़ा रहा था अर्थात 2012 में उसने प्रधानाचार्य के पद का फॉर्म भरा तो निश्चित तौर पर उसे 11 वीं और 12 वीं में दस वर्ष पूर्व पढ़ाने के लिए 2002 में ही एम . ए . पास हो जाना चाहिए था । लेकिन डेविड लूक ने साक्षात्कार के समय 2007 की एम . ए . की अंक तालिका प्रस्तुत की थी। चयन समिति के सभी सदस्य भी इस बात की गवाही और हलफनामा देने को तैयार हैं कि डेविड लुक ने साक्षात्कार के समय वर्ष 2007 में अंग्रेजी विषय के साथ छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से उत्तीर्ण होने की अंक तालिका के आधार पर ही फॉर्म भरा था जिससे जांच आगे बढ़ाई जा सके और कड़ी कार्यवाही हो सके।
