:विदेशी नेटवर्क से जुड़ा डिजिटल ठग गैंग गिरफ्तार,मर्सिडीज़-बेन और रेंज रोवर जैसी गाड़ी से चलते थे

रिपोर्ट कुलदीप शुक्ला
प्रयागराज पुलिस को साइबर अपराध की दुनिया में बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज की साइबर सेल ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है जो न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों से संचालित गिरोहों से भी जुड़ा हुआ था। गिरोह ने भारत में कई राज्यों में फैले नेटवर्क के ज़रिए करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में 5 ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है जबकि इस नेटवर्क से जुड़े कई आरोपी अभी फरार हैं।
वही प्रेसवार्ता करते हुए डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया गिरोह के सदस्य विदेशी नेटवर्क्स (लाओस, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम, चीन और थाईलैंड) से जुड़े थे। ये आरोपी भारतीय नागरिकों को टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों से झांसा देकर ऑनलाइन ट्रेडिंग, बाइनरी ऑप्शन, शेयर इन्वेस्टमेंट जैसे फर्जी स्कीमों में निवेश के लिए प्रेरित करते थे। निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए जाते थे और बाद में पीड़ितों को ब्लॉक कर दिया जाता था।
इस गिरोह की जांच में यह भी सामने आया है कि यह लोग फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स बनाकर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देते थे। फिर UPI, बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसे को विदेशों में बैठे नेटवर्क तक ट्रांसफर कर देते थे। गिरोह की गतिविधियां 14 राज्यों में फैली हुई थीं।
गिरफ्तार किए गए पांच अभियुक्तों में कौसुतु गुम्मा (ग्रेटर नोएडा), यामी हेनी (ग्रेटर नोएडा), अनुराग (दिल्ली), शानि झा (कानपुर) और हिमांशु कुमार (इटावा) शामिल हैं। इनके पास से 1 एप्पल फोन, 7 फर्जी मोबाइल फोन, 1 रेजर लैपटॉप, 1 टाटा सफारी, 1 पर्सनल बैंक POS मशीन, 14 सिम कार्ड, ATM कार्ड व ₹2,86,000 नगद बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि ये गिरोह भारत के लोगों को विदेशी निवेश प्लेटफॉर्म और डिजिटल प्रोजेक्ट्स में शामिल कर फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाता था। इसके बाद पैसे हड़पकर क्रिप्टो के जरिए विदेशों में भेज दिए जाते थे। इनका काम टेलीग्राम पर विदेशी अकाउंट से लिंक कर ‘एकाउंट सप्लाई’ करना और ‘डिस्ट्रीब्यूशन’ तक सीमित रहता था।
