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जगदगुरु नारायणाचार्य स्वामी शाडिल्य महराज के नेतृत्व में निकली यात्रा

जगदगुरु नारायणाचार्य स्वामी शाडिल्य महराज के नेतृत्व में निकली यात्रा

सनातन पर हमला बर्दाश्त नहीं : स्वामी शाडिल्य

सनातन धर्म पर हो रहे कुठाराघात
पर आकोश

प्रयागराज। सनातन धर्म पर लगातार हो रहे कुठाराघात को रोकने और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए श्रृंगवेरपुर धाम के पीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायणजी स्वामी शाडिल्य
महाराज के सानिध्य में सनातन यात्रा आज श्रृंगवेरपुर से निकाली गई और सनातन धर्म का विरोध करने वालों को कठोर शब्दों में चेतावनी दी गयी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आदि अनादि काल से चला आ रहा है जो चलता रहेगा लेकिन विरोध करने वाले कही ठहरते नही है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ जो भी गलत बयानबाजी और विरोध करेगा उसके खिलाफ संत समाज सडक पर उतरकर व्यापक स्तर पर विरोध करेगा।
सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के निमित्त मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और निषाद राज गुह्य की मिलन स्थली पौराणिक श्रृंगवेरपुर से सृष्टि निर्माण स्थली दशाश्वमेध घाट तक सनातन यात्रा निकाल कर सनातनियों का धर्म कि रक्षा के लिए आह्वाहन किया गया। वैष्णव आश्रम श्री निकेतन श्रृंगवेरपुर में श्रृंगवेरपुर धाम के पीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायणाचार्य शाडिल्य जी महाराज के सानिध्य में निकाली गई सनातन यात्रा में हजारों सनातनी शामिल हुए। वैदिक मन्त्रोंचार के साथ यह यात्रा श्रृंगवेरपुर आश्रम कठुआ पुल से शुरू हुई उसके पश्चात् श्रंगवेरपुर राम घाट पहुच कर विधिवत गंगा पूजन कर यात्रा प्रारम्भ की गई। नवाबगंज टोल से होते हुए यात्रा दशाश्वमेध घाट, दारागंज पर वैदिक रीति से गंगा पूजन कर ब्रह्मा जी के द्वारा स्थापित दशाश्वमेध महादेव का जलाभिषेक किया गया।
सनातन यात्रा का रास्ते में जगह – जगह फूल मालाओ से भव्य स्वागत किया गया। विश्व में सनातन की पताका हमेशा ऊंची रहे ऐसी कामना महादेव से की गई। यात्रा संयोजक
डॉ शिव पूजन मिश्रा ने बताया कि मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या और चित्रकूट के लिए भी सनातन यात्रा शीघ्र निकाली जाएगी। इस यात्रा में स्वामी विमलदेव जी महाराज, समाजसेवी अखिलेश तिवारी, कथावाचक राजेश्वर जी महाराज, कुलदीप नारायण तिवारी, वेद प्रकाश तिवारी,भुनेश्वरा नन्द, लावलेषा नन्द,बचाऊ सहित बडी संख्या में बटुक ब्राह्मण और सनातनी शामिल रहे।

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