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हाईकोर्ट ने बरेली की बीडीए कॉलोनी में ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक, नगर निगम की दंडात्मक कार्रवाई पर लगा बड़ा ब्रेक

हाईकोर्ट ने बरेली की बीडीए कॉलोनी में ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक, नगर निगम की दंडात्मक कार्रवाई पर लगा बड़ा ब्रेक

प्रयागराज.इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली के नैनीताल रोड स्थित टिवरीनाथ मंदिर क्षेत्र की बीडीए कॉलोनी में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने HIG-1, बीडीए कॉलोनी, टिवरीनाथ मंदिर, नैनीताल रोड स्थित संपत्ति के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से शासन, नगर निगम बरेली और बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को प्रतिबंधित कर दिया है।

मामले का विवरण यह मामला गीता गुप्ता और अंबिका गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर आया है, जो इस संपत्ति की स्वामी हैं। याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा उनके भवन पर लाल पेंट से “X” का निशान लगाने और ध्वस्तीकरण की मौखिक धमकी देने को अदालत में चुनौती दी थी। विवाद तब और बढ़ गया जब नगर निगम बरेली ने 15 अप्रैल 2026 को एक नोटिस भवन पर चस्पा कर दिया, जो कि किरायेदार पंजाब नेशनल बैंक के नाम पर जारी किया गया था, न कि भवन स्वामियों के नाम पर। कानूनी तर्क याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुबोध कुमार और उदित चंद्रा ने अदालत को बताया कि यह निर्माण पूरी तरह वैध है और 1999 में बीडीए द्वारा स्वीकृत मानचित्र (संख्या 254/99) के अनुसार ही किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि प्राधिकरण की यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय द्वारा ध्वस्तीकरण दिशा-निर्देश (2024/2025) में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, किसी भी ध्वस्तीकरण से पहले 15 दिन का कारण बताओ नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया।

उच्च न्यायालय ने माना कि यह मामला विचारणीय है और प्रतिवादियों को 10 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने अगले आदेश तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है, जिससे उस भवन को सुरक्षा मिली है जिसमें वर्तमान में पंजाब नेशनल बैंक की शाखा संचालित हो रही है।

 

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