चुनौतियों का संघ के साथ मिलकर मुकाबला करें सभी देशवासी- स्वांत रंजन

प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन जी ने आज यहां सभी देशवासियों से देश के सामने खडी चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए चार बड़ी चुनौतियों से मिल कर निपटना होगा।
वे शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत द्वारा आयोजित प्रयागराज के गौहनिया स्थित वात्सल्य परिसर में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग सामान्य एवं प्रांत घोष वर्ग के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप मेंसंबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अपने दीक्षान्त उद्बोधन मे आगे कहा कि आतंकवाद, अर्बन नक्सलवाद, मातांतरण तथा बाजारवाद समेत चार चुनौतियां देश के सामने मुह बाये खड़ी है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संघ के साथ पूरे समाज को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा।
उन्होंने कहा कि 100 वर्ष से संघ हिंदू समाज को सशक्त बनाने के लिए, उसकी शक्ति खड़ी करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके लिए उसे उपेक्षा और उपहास का भी सामना करना पड़ा। इन स्थितियों के बाद अब समाज में संघ की स्वीकार्यता बढी है लेकिन इस स्थिति से हम अभी भी संतुष्ट नहीं है। हमें अभी आगे और परिश्रम करना है। उन्होंने बड़े साफ शब्दों में कहा कि भारत प्राचीन राष्ट्र है और हिंदू राष्ट्र है।हिंदू समाज ने इसकी रक्षा के लिए पसीना भी बहाया है और खून भी।आर्यों के बाहर से यहां आकर बसने की थ्योरी पूरी तरह मनगढ़ंत है।यह एक सुनियोजित साजिश है। इससे देशवासियों को सावधान रहने की जरूरत है।
संघ पंच परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। सभी देशवासी संघ के साथ जुड़कर कार्य करें जिससे भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। उन्होंने आग्रह किया कि जो जहां है वहीं से इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए अपना सहयोग दें।
अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख ने कहा कि कार्यकर्ताओं का निर्माण करने के लिए देशभर में और 98 संघ शिक्षावर्ग चल रहे हैं। इसका उद्देश्य है वर्ग में तैयार होकर के कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में संघ कार्य को आगे बढ़ाएं। उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग के विषयों की भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि शारीरिक बौद्धिक कार्यक्रमों के द्वारा स्वयंसेवकों को एक प्रामाणिक कार्यकर्ता के रूप में निर्माण किया जाता है।
पिछले 100 वर्षों से संघ राष्ट्र जागरण के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। संघ के समर्पित स्वयंसेवक इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र जागरण के इस महत्वपूर्ण कार्य में पूरे समाज को आगे बढ़कर अपना सहयोग करना होगा तभी लक्ष्य की पूर्ति हो सकेगी।
देश को परम वैभव पर ले जाना है तो सभी देशवासियों को मिलकर राष्ट्र निर्माण के इस अनुष्ठान में तन मन धन से लगना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. जगदीश गुलाटी ने कहा कि संघ पूरे समाज को जोड़ने के लिए काम कर रहा है। सभी देशवासियों को संघ से जुडना चाहिए। सामाजिक समरसता के लिए संघ द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय है।प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि आवश्यकता पडने पर देश सेवा के लिए हमेशा तैयार रहें।
कार्यक्रम का प्रारंभ संघ प्रार्थना के पश्चात शिक्षार्थियों द्वारा ध्वज की मान वंदना प्रदक्षिणा से हुई। इसके पश्चात शिक्षार्थियों ने दण्ड, पद विन्यास, यष्टि, नियुद्ध, दण्ड व्यायाम योग, व्यायाम योग, आसन का आकर्षक प्रदर्शन किया।
*शताब्दी वर्ष के प्रतीक 100 पर व्यूह रचना का हुआ प्रदर्शन*
घोष के प्रशिक्षणार्थियों ने भारतीय रागों पर आधारित रचनाओं का वादन करते हुए समारोह मे आकर्षक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के क्रम में घोष की रचनाओं में शताब्दी वर्ष का प्रतीक 100 पर आधारित व्यूह रचना में स्वस्तिक, शंख में किरण, वेणु में स्वर पाठ एवं व्यायाम योग के समय कावेरी, ध्वजारोपणम, ध्वजावतरण का प्रमुख रूप से प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को भारतीय राग से परिचित कराया।
मंच पर प्रांत संघ चालक अंगराजजी सर्वाधिकारी गौतम सिंहकी उपस्थिति उल्लेखनीय वर्गकार्यवाह डॉक्टर संजय जी ने अतिथि परिचय एवं व्रृत्त निवेदन किया। सर्वव्यवस्था प्रमुख आशीष जी ने आभार प्रकट किया।
समारोह में प्रांत प्रचारक रमेश जी वर्ग पलक सुनील जी प्रचारक प्रमुख राम चन्द्र जी मुख्य शिक्षक कौशल जी के अतिरिक्त प्रांत कार्यवाह मुरलीपाल सहकार्यवाह डा राकेश जी प्रांत प्रचार प्रमुख डॉक्टर मुरार जी त्रिपाठी बौद्धिक प्रमुख डा कुलदीप जी सत्यविजय जी घनश्याम जी डा नीरज अग्रवाल डा कीर्तिका अग्रवाल विधायक पीयूष रंजन हर्षवर्धन बाजपेई राजमणि कोल दीपक पटेल प्रदेश के पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह समेत बडी संख्या मे गणमान्य नागरिक एवं माताये बहने उपस्थित रही।
