मऊआइमा में कूटरचित दस्तावेजों से जमीन कब्जाने का आरोप, शिकायत पर मुकदमा दर्ज
मऊआइमा थाने में दर्ज हुआ मामला
प्रयागराज/मऊआइमा। उत्तर प्रदेश में भूमाफियाओं और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ सरकार की सख्ती के बावजूद जमीनों पर कूटरचित दस्तावेजों के सहारे कब्जे की कोशिशों के मामले सामने आ रहे हैं। मऊआइमा कस्बे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां अपनी भूमि पर कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर दावेदारी और कब्जे के प्रयास से परेशान भूमि स्वामी अब्दुल मन्नान ने राजस्व विभाग में शिकायत की। शिकायत के बाद हुई जांच में दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने 14 अगस्त 2026 को मुकदमा दर्ज किया।
मामला मऊआइमा कस्बे की गाटा संख्या 4713 सहित संबंधित भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है। अब्दुल मन्नान का कहना है कि उन्होंने उक्त भूमि वर्ष 1969 में नूरजहां से खरीदी थी और भूमि पर उनका अधिकार है। आरोप है कि बाद में कूटरचित खसरा एवं अन्य दस्तावेज तैयार कर उनकी भूमि को दूसरे लोगों के नाम रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर मुजफ्फर हक मुजाहिद द्वारा भूमि को आरिफ मुनाफ, मोहम्मद मोहित एवं लालू सोनी के नाम रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप है। रजिस्ट्री के बाद कथित रूप से उक्त भूमि पर जेसीबी के माध्यम से कब्जा करने का प्रयास भी किया गया। इस पर अब्दुल मन्नान की ओर से राजस्व विभाग में प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की गई।
राजस्व विभाग द्वारा संबंधित सरकारी अभिलेखों और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान अभिलेखों में दर्ज भूमि और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के बीच कथित अंतर सामने आने के बाद मामले को पुलिस के संज्ञान में लाया गया। इसके बाद 14 अगस्त 2026 को मऊआइमा थाने में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित कूटरचित दस्तावेज कहां तैयार किए गए, उन्हें तैयार कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे और इन दस्तावेजों के आधार पर भूमि की रजिस्ट्री कराने की पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि यदि किसी व्यक्ति की भूमि से संबंधित सरकारी अभिलेख उपलब्ध हैं तो कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कोई दूसरा व्यक्ति उस पर दावा कैसे कर सकता है।
फिलहाल 14 अगस्त को मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। अब देखना यह है कि जांच कथित कूटरचित दस्तावेज तैयार करने वालों तक पहुंचती है या नहीं और पीड़ित भूमि स्वामी की जमीन को लेकर लगाए गए आरोपों की सच्चाई किस हद तक सामने आती है।
