असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती मामले में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी विवादों में
12 पदो पर होना था चयन
न्याय विभाग ने मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज
डॉ राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय प्रयागराज में प्रोफेसर उषा टंडन कुलपति के द्वारा व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार करते हुए अपने चहेतो का चयन नियम विरुद्ध कर लिया गया है |
जिन लोगों का चयन किया गया है यदि उनकी एपीआई यूजीसी अधिनियम के अनुसार बनाई जाती तो आधे से अधिक साक्षात्कार के लिए ही योग्य नहीं पाए जाते इसलिए ही अपने चहेतो का चयन करने के लिए कुलपति ने यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार भर्ती नहीं की, जबकि 27 जनवरी 2026 को प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय द्वारा जब सहायक आचार्य के 12 पदों की स्वीकृति प्रदान की गई थी तो भर्ती का स्रोत केवल यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार किया जाएगा |यदि यूजीसी रेगुलेशन के हिसाब से चयनितों की एपीआई बनती तो वह निम्नवत होती –
श्रेणी, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग
विवेक त्रिवेदी की एपीआई केवल 38 बन रही है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईडब्ल्यूएस के सभी छात्रों में अकादमिक रूप से सबसे कमजोर विवेक त्रिवेदी ही है, अन्य सभी छात्र अकादमिक में इससे अधिक मार्क्स पाए हुए हैं |
सामान्य वर्ग में
यश शर्मा की 41, गरिमा सिंह की 51 एपीआई बनती है |
जबकि ओबीसी वर्ग में गौरव कुमार सचान की 41, आकृति शर्मा की 41, तथा एससी वर्ग में तान्या सागर की 51 बनती है, अगर ईमानदारी से चयनितों का परीक्षण किया जाए तो 12 में से 6 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू कॉल ही नहीं आती |
कुलपति ने भ्रष्टाचार के लिए नियम कानून की अनदेखी करते हुए अपने चहेतो का चयन करने के लिए शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अयोग्य लोगों को इंटरव्यू में बुलाकर उनका चयन कर लिया,
जबकि आवेदन करने वालों में ऐसे 100 से अधिक छात्र हैं जिनका अकादमिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा है, जिनके एलएल बी एव एलएल एम मे 80 से अधिक परसेंट मार्क्स आए हुए हैं किंतु उनका चयन किया गया है जिनके जिनके 55 परसेंट मार्क एलएलबी में आए हैं | भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार करते हुए,
डॉ राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराज में कुलपति के भ्रष्टाचार के अमृत काल में नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं |विश्वविद्यालय के विधि विभाग के अध्यक्ष, डॉ दीपक शर्मा ने स्क्रीनिंग कमेटी में बैठकर खुद अपने सगे जीजा विदित को इंटरव्यू के लिए चयनित कर लिया
यह भर्ती शुरू से ही विवादों के कटघरे में आ गई है, स्क्रीनिंग में ही शासन द्वारा बताए गए दिशा निर्देशों के बावजूद भी भयंकर गलतियां की गई है |
दीपक शर्मा के द्वारा अपने जीजा का स्क्रीनिंग अपने आप में पूरी प्रक्रिया को संदेह के कटघरे में खड़ा कर देता है| विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि कुलपति से लेनदेन का रेट नहीं तय हो पाया नहीं तो उसके जीजा का भी चयन हो जाता |
