प्रयागराज में जलभराव से न्यायिक कार्य प्रभावित, हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने उठाई आवाज

प्रयागराज। शहर के विभिन्न मोहल्लों में बारिश के कारण हुए जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इसका असर न्यायिक कार्य, व्यापार, शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई अधिवक्ताओं ने न्यायालय में जलभराव की गंभीर समस्या से अवगत कराया।
पूर्व अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अमरेंद्र नाथ सिंह, प्रभाकर अवस्थी, सुधीर दीक्षित, विनय खरे, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सिन्हा, आरपी पांडेय, शौर्य शर्मा, नितिन शर्मा सहित कई अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि प्रशासन, नगर निगम और विकास प्राधिकरण की कथित लापरवाही के कारण जलभराव, सीवर जाम तथा बारिश के पानी की निकासी न होने से हजारों घरों में पानी प्रवेश कर गया है।
अधिवक्ताओं के अनुसार जलभराव के कारण अधिवक्ताओं, अधिवक्ता क्लर्कों और वादकारियों को न्यायालय पहुंचने में परेशानी हुई। बड़ी संख्या में लोग न्यायालय नहीं पहुंच सके, जिससे न्यायिक प्रक्रिया के निस्तारण में भी बाधा उत्पन्न हुई। उनका कहना है कि समस्या से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने न्यायालय को अवगत कराया कि प्रयागराज नगर में जलभराव की समस्या को लेकर पूर्व में दो जनहित याचिकाएं भी दाखिल की जा चुकी हैं। इंदिरा स्वरूप एवं सत्य प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा दाखिल जनहित याचिका संख्या 50717/14 तथा जनहित याचिका संख्या 51612/14 में न्यायालय की ओर से राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कई निर्देश दिए गए थे।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि इन निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ। पूर्व महासचिव हाईकोर्ट बार एसोसिएशन नितिन शर्मा ने बताया कि न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 अगस्त 2026 को सुनवाई की संभावना जताई है।
अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि प्रयागराज में जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त हो सके और आम लोगों के साथ न्यायिक कार्य प्रभावित न हों।
