डॉ. पारसनाथ तिवारी : शिक्षा, समाजसेवा और राजनीति में उत्तर भारतीयों की बुलंद आवाज

मुंबई श्रीकेश चौबे:-टिटवाला/कल्याण। महाराष्ट्र की धरती पर रहते हुए उत्तर भारतीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हितों की आवाज को लगातार बुलंद करने वाले डॉ. पारसनाथ तिवारी आज टिटवाला, कल्याण और आसपास के क्षेत्रों में एक सक्रिय सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।
डॉ. पारसनाथ तिवारी P.T.R.S. इंग्लिश स्कूल के संस्थापक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कार्य किया है। इसके साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी वे लंबे समय से सक्रिय हैं और महाराष्ट्र में एक दर्जन से अधिक सामाजिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के अध्यक्ष अथवा प्रमुख पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
उत्तर भारतीय समाज के अधिकारों के लिए रहे मुखर
उत्तर भारतीय समाज के मुद्दों को लेकर डॉ. तिवारी हमेशा मुखर रहे हैं। कल्याण और आसपास के क्षेत्रों में उत्तर भारतीयों से जुड़े सामाजिक एवं जनहित के अनेक मुद्दों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया। समाज को संगठित करने और उसकी समस्याओं को प्रशासन एवं राजनीतिक मंचों तक पहुंचाने में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
उत्तर भारतीय समाज को संगठित करने वाले विभिन्न प्रयासों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है और वे उत्तर भारतीय संगठन के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे हैं। यही कारण है कि उत्तर भारतीय समाज के बीच उनका व्यापक सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
शरद पवार से पुराने राजनीतिक संबंध, अब अजित पवार की एनसीपी में सक्रिय
डॉ. पारसनाथ तिवारी का राजनीतिक सफर भी काफी पुराना और प्रभावशाली रहा है। वे लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े रहे हैं और एक समय शरद पवार साहब व अजीत पवार जी के करीबी राजनीतिक सहयोगियों में उनकी गिनती होती है। वर्षों के राजनीतिक संबंधों ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति में व्यापक संपर्क और अनुभव प्रदान किया।
बदलते राजनीतिक समीकरणों के बाद वर्तमान समय में डॉ. तिवारी अजित दादा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से जुड़े हुए हैं और पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके उपमुख्यमंत्री सुमित्रा पवार तथा पार्थ पवार जी के साथ भी पारिवारिक एवं घरेलू संबंध बताए जाते हैं, जिसके कारण राजनीतिक रिश्तों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी मजबूत रहे हैं। साथ ही साथ डॉ. तिवारी के सभी राजनैतिक पार्टियों से मधुर संबंध भी हैं।
राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। सामाजिक कार्यों के लिये उन्हे दिल्ली में डॉक्टरेट की मानद उपाधि, विजनरी इंडियन अवॉर्ड 2025, पुणे में महाराष्ट्र रत्न,दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, बाबू आर . यन.सिंह आदर्श समाजसेवी पुरस्कार 2025 सहित दर्जनों पुरस्कारो से दिल्ली, लखनऊ,पुणे मुम्बई नागपुर में सम्मानित किया जा चुका है।वे राजनीतिक मंच को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर उत्तर भारतीय समाज से जुड़े विषयों को सामने रखने का माध्यम मानते हैं।
शिक्षा, समाजसेवा और संगठन—तीनों क्षेत्रों में सक्रिय
डॉ. तिवारी का सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। शिक्षा, समाजसेवा, संगठन निर्माण और उत्तर भारतीय समाज के हितों की आवाज उठाना उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख पहलू रहे हैं। टिटवाला से लेकर कल्याण और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों तक सामाजिक गतिविधियों में उनकी निरंतर सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।
लंबे राजनीतिक अनुभव, सामाजिक संपर्कों और संगठनात्मक क्षमता के कारण डॉ. पारसनाथ तिवारी को उत्तर भारतीय समाज के ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने महाराष्ट्र में रहते हुए उत्तर भारतीयों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज को राजनीतिक एवं सामाजिक मंचों तक पहुंचाने का लगातार प्रयास किया है।
टिटवाला की धरती से शुरू हुई उनकी सामाजिक और शैक्षणिक सक्रियता आज व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक दायरे तक पहुंच चुकी है। शिक्षा से समाजसेवा और समाजसेवा से राजनीति तक का उनका सफर उनके सार्वजनिक जीवन की विशेष पहचान बन गया है।
