ग्राम प्रधान पद से हटाने का आदेश रद्द ,
मामला नियमानुसार निर्णय वापस
विधि संवाददाता प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने ग्राम प्रधान स्मृति प्रेमवती देवी को पद से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया हैऔर नये सिरे निर्णय के लिए मामला वापस भेज दिया है।
याची के खिलाफ शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 95(1)(जी) के तहत जांच शुरू की गई थी। पहला नोटिस 22 मई 2025 को जारी हुआ, जिसका जवाब उन्होंने 16 जून 2025 को दिया। इसके बाद मामला कई बार कोर्ट में गया। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित सुनवाई का अवसर देकर अंतिम आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।
याची अधिवक्ता सौरभ बसु ने तर्क दिया कि 22 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के साथ जांच रिपोर्ट संलग्न नहीं की गई थी, इसलिए कोई जवाब नहीं दिया जा सका। साथ ही यह भी कहा गया कि धारा 95(1)(जी) के तहत केवल प्रधान को हटाने का निर्णय हो सकता है, वित्तीय दंड के लिए अधिनियम की धारा 27 और नियम 258-259 के तहत अलग कार्यवाही आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं हुई।
अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन ने वसूली आदेश का समर्थन नहीं किया, यह स्वीकार करते हुए कि इसके लिए अलग प्रक्रिया आवश्यक थी।
कोर्ट ने पाया कि 22 जनवरी 2026 के नोटिस में केवल तीन दिन का समय दिया जाना उचित अवसर नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, जिस जांच रिपोर्ट (7 फरवरी 2026) पर आदेश आधारित था, वह 22 जनवरी के नोटिस के बाद हुए एक निरीक्षण (4 फरवरी 2026) पर आधारित थी, और इस नई रिपोर्ट पर कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया।जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।
इस आधार पर कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 के आदेश को रद्द कर मामला संबंधित अधिकारी को वापस भेज दिया। याचिकाकर्ता को अब चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि नए सिरे से विधिसम्मत आदेश पारित किया जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल प्रक्रियागत खामी के आधार पर पारित किया गया है, वित्तीय अनियमितता के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
