प्रयागराज लॉबी में नशामुक्ति एवं संरक्षा संगोष्ठी आयोजित

*कुलदीप शुक्ला उजाला शिखर
“नशामुक्त रनिंग कर्मचारी — सुरक्षित रेल संचालन की मजबूत कड़ी”
प्रयागराज, 19 अगस्त 2026
प्रयागराज लॉबी में ब्रह्माकुमारी संस्थान के नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत रनिंग कर्मचारियों के लिए नशामुक्ति एवं संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रनिंग कर्मचारियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ तनावमुक्त, अनुशासित एवं सुरक्षित रेल संचालन के लिए प्रेरित करना था।
संगोष्ठी में ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रमुख वक्ता श्रद्धा दीदी एवं कुंदन जी ने रनिंग कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया कि नशामुक्त जीवन न केवल व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि रेल परिचालन जैसी अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण सेवा में एकाग्रता, सजगता एवं सही निर्णय क्षमता बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर उपस्थित रनिंग कर्मचारियों को नशे से पूर्णतः दूर रहने, स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने तथा सदैव संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सामूहिक प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।
मुख्य क्रू नियंत्रक (सामान्य) वासुदेव पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि रनिंग कर्मचारियों की ड्यूटी अत्यंत संवेदनशील एवं उत्तरदायित्वपूर्ण होती है। अनियमित कार्य समय, लगातार सतर्कता तथा परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों के कारण तनाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान किसी भी प्रकार के नशे में नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, योग-ध्यान, नियमित दिनचर्या, पारिवारिक संवाद एवं आत्मानुशासन में है। उन्होंने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं नशामुक्त रहें तथा अपने परिवार और समाज को भी नशामुक्ति के लिए प्रेरित करें।
मुख्य क्रू नियंत्रक (परिचालन) वी. के. गर्ग ने रनिंग कर्मचारियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए तनाव प्रबंधन, ड्यूटी के दौरान पूर्ण एकाग्रता तथा नशाविहीन कार्य संस्कृति की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित रेल संचालन के लिए कर्मचारी का मानसिक रूप से स्वस्थ, तनावमुक्त और पूर्णतः सजग रहना अत्यंत आवश्यक है। संगोष्ठी के दौरान रनिंग कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा नशामुक्त एवं संरक्षा-केंद्रित कार्य संस्कृति को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया! प्रयागराज लॉबी में आयोजित यह संगोष्ठी कर्मचारियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और रेल संरक्षा को एक साथ जोड़ने वाली एक सार्थक पहल रही।
