राजनीति में शुचिता, जनसरोकार और सादगी का संगम
प्रयागराज में ‘अविराम कर्मयोगी’ अभिनंदन ग्रंथ का पूर्वावलोकन समारोह सम्पन्न

उजाला शिखर
**प्रयागराज, 25 अगस्त 2026।** वरिष्ठ जननेता एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह के 86वें अवतरण दिवस की पूर्व संध्या पर प्रयागराज के एक होटल में उनके छह दशकों के सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक संघर्ष और जनसेवा पर आधारित अभिनंदन ग्रंथ **‘अविराम कर्मयोगी’** का पूर्वावलोकन समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संयोजन अभिनंदन ग्रंथ संपादन समिति के अध्यक्ष अजीत सिंह ने किया।
इस अवसर पर **‘राजनीति में शुचिता, प्रतिबद्धता और जनसरोकार’** विषय पर विशेष विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद **उज्ज्वल रमण सिंह** ने कहा कि प्रयागराज के लोगों से बाबू जी का रिश्ता कभी महज राजनीतिक नहीं रहा। यह रिश्ता राजनीति की सीमाओं से कहीं ऊपर आत्मीयता, विश्वास, प्रेम और पारिवारिक संबंधों का रिश्ता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1974 से अनवरत चला आ रहा यह संबंध आज पाँच दशकों की यात्रा पूरी कर चुका है। इन वर्षों में बाबू जी और उनके परिवार ने प्रयागराज के लोगों के साथ जो अपनत्व और विश्वास अर्जित किया, उसे केवल प्रेम और भाईचारे जैसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है। यह रिश्ता केवल चुनाव और राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुख-दुःख, संघर्ष और जीवन के हर पड़ाव में साथ खड़े रहने का रिश्ता रहा है। यही कारण है कि प्रयागराज की जनता के लिए बाबू जी केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह रहे हैं।
सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि बाबू जी के जीवन और उनकी पाँच दशकों की राजनीतिक एवं सामाजिक यात्रा पर तैयार किया गया **‘अविराम कर्मयोगी’** केवल एक व्यक्ति के राजनीतिक जीवन का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रयागराज की राजनीतिक, सामाजिक और जनसरोकारों से जुड़ी पाँच दशक की यात्रा का महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बनेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए संपादक मंडल को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपने श्रम, शोध, संस्मरण और भावनाओं से इस ग्रंथ को आकार दिया है, वे अभिनंदन के पात्र हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह ग्रंथ शीघ्र अपने पूर्ण स्वरूप में प्रकाशित होकर आने वाली पीढ़ियों के लिए बाबू जी के सार्वजनिक जीवन, प्रतिबद्धता, शुचिता और जनसरोकारों की मूल्यवान धरोहर बनेगा।
इस अवसर पर सांसद ने अल्लामा इकबाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ पढ़ते हुए कहा—
**“हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा।”**
उन्होंने कहा कि ये पंक्तियाँ कुंवर रेवती रमण सिंह जैसे विरल व्यक्तित्व पर पूरी तरह चरितार्थ होती हैं।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि कुंवर रेवती रमण सिंह का सार्वजनिक जीवन सत्ता की राजनीति से अधिक जनता के सरोकारों, संघर्ष और विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है। छह दशकों की उनकी राजनीतिक यात्रा में जनता से सीधा संवाद, क्षेत्र के विकास के लिए संघर्ष और सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता विशेष रूप से दिखाई देती है।
विचार गोष्ठी के दौरान **‘अविराम कर्मयोगी’** के विभिन्न अध्यायों और विषय-वस्तु पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कुंवर रेवती रमण सिंह के जीवन संघर्ष, शुरुआती जीवन, राजनीति में प्रवेश और समाजसेवा के भाव से विकसित उनके जननेता के स्वरूप को रेखांकित किया। उनके राजनीतिक जीवन की नींव से लेकर जनता के प्रति अटूट समर्पण तक की यात्रा को ग्रंथ का महत्वपूर्ण पक्ष बताया गया।
ग्रंथ में शामिल **‘गंगाप्रेम से अभिभूत एक संवेदनशील राजनेता’** विषय पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि मां गंगा के प्रति कुंवर साहब का अगाध प्रेम केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी संवेदनशील सोच को भी दर्शाता है। इसी प्रकार **‘कुंवर साहब के समय की राजनीति और समाज’** खंड तत्कालीन राजनीतिक एवं सामाजिक परिवेश को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परिचर्चा में उन अध्यायों पर भी प्रकाश डाला गया, जिनमें विभिन्न नेताओं के कुंवर रेवती रमण सिंह के प्रति विचार, **विरोधियों और मित्रों के बीच उनकी लोकप्रियता**, मंत्री एवं सांसद के रूप में उनके कार्य, वरिष्ठ नेताओं के संस्मरण तथा लोकसभा और राज्यसभा में उनके द्वारा उठाए गए जनहित के सवाल शामिल हैं। वक्ताओं ने कहा कि ये अध्याय उनके राजनीतिक जीवन की व्यापक स्वीकार्यता और जनता की आवाज को सदन से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाने की उनकी विशिष्ट शैली को सामने लाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि **कुंवर रेवती रमण सिंह का जीवन राजनीति में शुचिता, सादगी, संघर्ष और जनसरोकारों की ऐसी मिसाल है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाना आवश्यक है।** ‘अविराम कर्मयोगी’ इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक प्रयास है।
अंत में अभिनंदन ग्रंथ संपादन समिति के अध्यक्ष **अजीत सिंह** ने सभी अतिथियों, प्रबुद्धजनों, राजनीतिक विश्लेषकों, सहयोगियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कुंवर रेवती रमण सिंह को उनके 86वें अवतरण दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह ग्रंथ उनके विराट व्यक्तित्व और दीर्घ जनसेवा को समाज के सामने प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास है।
समारोह में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग, राजनीतिक विश्लेषक तथा क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री टीo पीo सिंह, पूर्व मुख्यचिकित्साधिकारी श्री निसार अहमद, श्री श्लेष गौतम, श्री प्रदीप मिश्रा’अंशुमन’, श्री सुभाष पाण्डेय, श्री सोयब खा, श्री रामजी केशरवानी, श्री अमिताभ पाण्डेय, श्री चन्दन शर्मा, श्री मणिशंकर द्विवेदी,
श्री मुनेस्वर मिश्र, श्री सत्यवीर मुन्ना, श्री रविंद्र सिंह यादव, श्री श्रीकांत, श्री शिवशंकर केशरवानी, श्री अनय प्रताप सिंह,मौजूद रहे
