रानी रेवती देवी में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक वंदे मातरम के सस्वर गायन का भव्य आयोजन

प्रयागराज l विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर, प्रयागराज के सभागार में विद्या भारती अखिल भारती शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित “नमामि भारतम” कार्यक्रम के अंतर्गत वंदे मातरम के 150वें वर्ष के अवसर पर प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्रातः 11:00 बजे “एक समय, एक लय, एक स्वर” सामूहिक वंदे मातरम के सस्वर गायन का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अंबरीश शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान, नेशनल पीजी कॉलेज जंघई तथा अध्यक्षता नवीन वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, लॉ विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने की। दोनों अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह ने अंगवस्त्रम एवं श्रीफल से किया l
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. अंबरीश शर्मा ने वंदे मातरम के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका लेखन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को किया था। तत्पश्चात इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में स्थान दिया। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए एक उद्घोष बन गया। कांग्रेस के अधिवेशनों में प्रारंभ और अंत में इसे गाया जाने लगा। 1923 में काकीनाडा अधिवेशन में विरोध शुरू हुआ, तमाम राजनीतिक झंझावातों को झेलते हुए भी आज 150 वर्ष बाद यह गीत अपनी यात्रा पर कायम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. नवीन वर्मा ने भैया-बहनों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना है, यह हमारे अंदर सेवा और समर्पण का भाव जागृत करने वाला गीत है। आप सब सौभाग्यशाली हैं जो इस संस्थान में पढ़ रहे हैं और इस गीत को गा रहे हैं।
कार्यक्रम में संगीताचार्य मनोज गुप्ता के निर्देशन में विद्यालय की छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं अध्यापक एवं अध्यापिकाओं ने वंदे मातरम का सस्वर और मनमोहक गायन प्रस्तुत किया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने भैया-बहनों को इस गीत के महत्व को बताते हुए कहा कि हम इसे प्रतिदिन गाते हैं, लेकिन आज का गायन कुछ विशेष है। कार्यक्रम का कुशल संचालन दिनेश कुमार शुक्ला ने किया तथा अतिथियों का परिचय सत्य प्रकाश पाण्डेय ने कराया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रमेश चंद मिश्रा, जटाशंकर मिश्रा, कामाख्या प्रसाद दुबे, शैलेश सिंह यादव, दयाशंकर गुप्ता, दीपक दयाल, प्रभात शर्मा, सुनील गुप्ता, पायल जायसवाल, पूजा मिश्रा, सत्येंद्र चौबे सहित समस्त अध्यापकों का योगदान सराहनीय रहा l
