जबलपुर में प्रवासी पंछियों का आगमन: एक अनोखा अनुभव”

“राष्ट्रीय पंछी दिवस की पूर्व संध्या पर *उमा शंकर मिश्रा की रिपोर्ट*
_प्रवासी पंछियों का झुंड जबलपुर में दिखा रहा है अपनी अनोखी छटा_
जबलपुर: सर्दियों का मौसम और प्रवासी पंछियों का आगमन, यह दोनों चीजें जबलपुर के लोगों के लिए एक अनोखा अनुभव लेकर आई हैं। इन दिनों नर्मदा तट और मैदानी क्षेत्रों में प्रवासी पंछियों का झुंड देखने को मिल रहा है, जो अपनी अनोखी छटा से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
ठंड के मौसम में गुनगुनी धूप का आनंद लेते हुए तोते पेड़ों पर दिख जाते हैं, जबकि साइबेरियन बर्ड की अटखेलियां नर्मदा जल में पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा, कई अलग-अलग प्रजाति के पंछी शहर के बाशिंदों को आकर्षित कर रहे हैं।
जबलपुर के लोग प्रवासी पंछियों के आगमन को एक अनोखा अनुभव मानते हैं और उनकी अनोखी छटा को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। यह दृश्य न केवल पर्यावरण की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रकृति की सुंदरता को कैसे संरक्षित किया जा सकता है।
फोटोग्राफी के शौकीन लोग शहर के पार्क डुमना नेशनल पार्क, कान्हा नेशनल पार्क, बांधवगढ़, वह साइबेरियन पक्षियों की अलग-अलग मुद्राओं में अटकेलिया करते फोटो के लिए नर्मदा तट के किनारे पहुंच रहे हैं। उनके कैमरे में कैद होती साइबेरियन पक्षियों की तस्वीरें न केवल उनकी सुंदरता को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि कैसे ये पक्षी अपने आवासों में रहने के लिए अनुकूल होते हैं।
इस अवसर पर, हम राष्ट्रीय पंछी दिवस की याद करते हैं, जो प्रत्येक वर्ष 5 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस एवियन वेलफेयर कोएलिशन और बॉर्न फ्री यूएसए द्वारा शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य पक्षियों के कल्यज्ञान और उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य पक्षियों के संरक्षण और उनके आवासों की सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पक्षियों का संरक्षण न केवल पर्यावरण की सुंदरता को बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि यह भी बताता है कि हम प्रकृति के साथ कैसे सहजता से रह सकते हैं।
