हिंदुस्तानी एकेडेमी की त्रैमासिक पत्रिका के महाकुम्भ विशेषांक का प्रकाशन

*महाकुम्भ विशेषांक पत्रिका में हैं धर्म और साहित्य के मर्मज्ञों के लेखों का संकलन*
*महाकुम्भ में हिंदुस्तानी एकेडेमी कर रही है साहित्यिक प्रदर्शनी और साहित्यकार दीर्धा का संचालन*
*हिंदुतानी एकेडेमी की साहित्यिक दीर्धा में हो रहा गोष्ठियों और परिचर्चाओं का आयोजन*
*महाकुम्भ और प्रयागराज पर आधारित पुस्तकों का हुआ है एकेडेमी से प्रकाशन*
*15 फरवरी- महाकुम्भ नगर।* लोक आस्था और सनातन परंपरा का महापर्व, महाकुम्भ सदा से साहित्यकारों को प्रभावित और प्रेरित करता है। निराला, पंत और महादेवी वर्मा की साहित्यिक त्रिवेणी से सिंचित प्रयागराज की धरा हिंदी साहित्य की भी उर्वर भूमि रही है। इसी क्रम में हिंदुस्तानी एकेडेमी ने महाकुम्भ के अवसर पर मेला क्षेत्र में साहित्यिक पुस्तक प्रदर्शनी और साहित्यकारों की दीर्धा लगाई है। साथ ही एकेडेमी ने महाकुम्भ विषय पर अपनी त्रैमासिक पत्रिका हिंदुस्तानी के विशेषांक का संपादन और प्रकाशन किया है। इसके अतिरिक्त एकेडेमी ने महाकुम्भ और प्रयागराज पर आधारित पुस्तकों का भी प्रकाशन किया है। जिनका विमोचन महाकुम्भ मेला क्षेत्र में लगी एकेडेमी की साहित्यिक प्रदर्शनी में किया गया है।
*त्रैमासिक पत्रिका हिंदुस्तानी का महाकुम्भ विशेषांक प्रकाशित*
महाकुम्भ के दिव्य भव्य आयोजन में हिंदुस्तानी एकेडेमी महाकुम्भ पर आधारित संस्था की त्रैमासिक पत्रिका हिंदुस्तानी का विशेषांक जारी कर रहा है। एकेडेमी के प्रकाशन विभाग के प्रभारी संतोष तिवारी ने बताया कि एकेडेमी ने इससे पहले 2019 में कुम्भ मेले पर भी विशेषांक जारी किया था। इस वर्ष महाकुम्भ के अवसर पर साहित्य, धर्म और आध्यात्म के ममर्ज्ञों के लेखों के संकलन का संपादन किया है। उन्होंने बताया कि पत्रिका का संपादन एकेडेमी के सचिव देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया है। पत्रिका में महाकुम्भ के धार्मिक, आध्यात्मिक पहलु के साथ इसके साहित्यिक और आम जन-जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही एकेडेमी ने प्रयाग गौरव और अभिनव प्रयाग नामक पुस्तकों का भी महाकुम्भ के अवसर पर प्रकाशन और विमोचन किया गया है। जिसमें महाकुम्भ और प्रयागराज के धार्मिक और एतिहासिक पहलुओं का विस्तृत विवेचन किया गया है।
*साहित्य दीर्धा में गोष्ठी और परिचर्चा का आयोजन*
संतोष तिवारी ने बताया कि एकेडेमी ने इसके साथ ही महाकुम्भ मेला क्षेत्र में साहित्यिक प्रदर्शनी और साहित्य दीर्धा भी लगाई है।जिसमें आम जन के ज्ञानवर्धन और संकलन के लिए एकेडेमी की प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शित किया जा रहा है। साहित्यिक दीर्धा में हिंदी साहित्य के रीति कालीन कवियों से लेकर आधुनिक और उत्तर आधुनिक कालीन कवियों, लेखकों का संक्षिप्त परिचय बताया जा रहा है। साथ ही साहित्यिक दीर्धा में समय-समय पर वैचारिक गोष्ठियों और साहित्यिक चर्चा का भी आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में वैश्विक परिदृश्य में महाकुम्भ विषय पर 09 फरवरी को देश भर के साहित्यकारों की परिचर्चा का आयोजन किया गया। देश भर से साहित्यकार विद्वानों ने प्रतिभाग किया। 17 फरवरी को डॉ देवी प्रसाद तिवारी रिसर्च फेलो गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक संस्थान प्रयागराज का एकल व्याख्यान होगा। इसके अलावा गोविंद बल्लभ पंत संस्थान के निदेशक बद्री नारायण तिवारी का सामाजिक समरसता का पर्व महाकुंभ विषयक व्याख्यान 19 फरवरी को एकेडेमी की साहित्यिक दीर्धा में किया गया। साथ ही 21 – 22 फरवरी को अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं हिंदुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में ’भारतीय वांग्मय में महाकुम्भ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
*साहित्यिक संस्थाओं को साहित्यिक कार्यक्रम हेतु आमंत्रण*
संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि महाकुंभ में जो भी साहित्यिक संस्थाएं संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन करना चाहती हैं वे सादर आमंत्रित हैं। एकेडेमी द्वारा कार्यक्रम हेतु सभागार एवं अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराया जाएगा।
