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डॉ.शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन ने एनडीआरएफ के साथ मनाया ‘राखी उत्सव’

डॉ.शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन ने एनडीआरएफ के साथ मनाया ‘राखी उत्सव’

 

रिपोर्ट अब्दुल वाहिद

भदोही वाराणसी। डॉ.शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन ने शुक्रवार एनडीआरएफ मुख्यालय में एक विशेष ‘राखी उत्सव’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वाराणसी के 15 बाढ़ प्रभावित झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों की 30 किशोरियों ने एनडीआरएफ के 70 जवानों को राखी बांधी। बाढ़ की विभीषिका में जब एनडीआरएफ के जवानों को अपने घर की याद आ रही थी वहीं इन किशोरियों ने जवानों को राखी बांध कर उन्हें अपनेपन का अहसास कराया। इस पहल से न केवल जवानों का मनोबल बढ़ और किशोरियों को भी सुरक्षा और आत्म-विश्वास की एक नई शक्ति मिली। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं था बल्कि यह सुरक्षा, सम्मान और निस्वार्थ सेवा के सार्वभौमिक बंधन का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम का शुभारंभ एनडीआरएफ के डीआईजी मनोज शर्मा के कुशल नेतृत्व में हुआ। सबसे पहले किशोरियों ने डीआईजी मनोज शर्मा को राखी बांधी जिसके बाद उन्होंने अन्य अधिकारियों और जवानों को राखी बांधी। इस मौके पर डिप्टी कमांडेंट नवीन शर्मा ने डॉ.शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रबंधक डॉ.यामिनी सैनी का गर्मजोशी से स्वागत किया। भेंट में एनडीआरएफ की ओर से सभी किशोरियों को चॉकलेट बांटी गईं।फाउंडेशन की कार्यक्रम संयोजिका ने कहा हमारा मानना है कि एक सुरक्षित और सशक्त बचपन ही एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है। इस राखी उत्सव ने हमारी किशोरियों को यह विश्वास दिलाया कि समाज में ऐसे निःस्वार्थ ‘भाई’ मौजूद हैं जो हर संकट में उनकी रक्षा के लिए तत्पर हैं। यह पहल उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। सीआर वाई परियोजना प्रबंधक दीक्षा सिंह ने एनडीआरएफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में हमारी यह किशोरियाँ जो बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही हैं ऐसे में एनडीआरएफ के जवानों को राखी बाँधकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह केवल एक रस्म नहीं है बल्कि यह एक शक्तिशाली संदेश है कि हमारे समाज में भी ऐसे ‘भाई’ मौजूद हैं जो बिना किसी व्यक्तिगत संबंध के, निःस्वार्थ भाव से उनकी और उनके परिवारों की रक्षा करते हैं।
कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कार्यक्रम निदेशिका डॉ. रोली सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व न केवल भाइयों के द्वारा बहनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता का पर्व है, बल्कि बहनों के द्वारा भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र डालकर उनका मनोबल और हौसला बढ़ाने का भी एक सशक्त रूप है। यह आयोजन इन किशोरियों के मन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगा और उन्हें यह विश्वास दिलाएगा कि वह अकेले नहीं हैं। उन्हें यह समझने में मदद करेगा कि एनडीआरएफ जैसी संस्थाएं उनके साथ खड़ी हैं और उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं। यह उनके भीतर आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की भावना को बढ़ावा देगा जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा। यह आयोजन किशोरियों को सशक्त बनाने और उन्हें यह महसूस कराने के हमारे लक्ष्य को दर्शाता है कि वह अकेली नहीं हैं।

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