सुप्रीम कोर्ट में फिल्म “घूसखोर पंडत” के खिलाफ जनहित याचिका
रिपोर्ट – कुलदीप शुक्ला
ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में फिल्म “घूसखोर पंडत” के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। यह vs याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और कथानक ब्राह्मण समुदाय को भ्रष्ट, घूसखोर और नैतिक रूप से पतित दिखाकर उनकी गरिमा, धार्मिक भावनाओं और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस याचिका का मसौदा अधिवक्ताओं पवन कुमार शुक्ला, भूपेश पांडे और एस.के. वारिश अली द्वारा तैयार किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में इसे डॉ. विनोद कुमार तिवारी, अधिवक्ता, द्वारा दाखिल किया गया है, जो याचिकाकर्ता के वकील के रूप में पेश हुए हैं।
याचिका में कहा गया है कि “पंडित” जैसे धार्मिक एवं जाति-आधारित संबोधन को “घूसखोर” शब्द के साथ जोड़ा जाना समुदाय विशेष को लक्षित करने वाला आपत्तिजनक और भेदभावपूर्ण चित्रण है, जो सामाजिक सौहार्द, सार्वजनिक व्यवस्था और सांविधानिक मूल्यों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और उस पर सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता तथा राष्ट्र की एकता-अखंडता के हित में अनुच्छेद 19(2) के तहत युक्तिसंगत सीमाएं लागू होती हैं।
याचिका में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे को प्रतिवादी बनाया गया है तथा फिल्म की रिलीज़, स्क्रीनिंग और प्रसारण पर रोक लगाने, साथ ही CBFC से प्रमाणन की पुनः समीक्षा कराने की मांग की गई है ।
