महादेव के विशालकाय स्वरूप का महाशिवरात्रि
(जीवन और चेतन के मिलन का प्रतीक महाशिवरात्रि हैं)

दिनेश तिवारी
धर्मसम्राट आचार्य विश्वपति शुक्ल जी महराज ने साक्षात्कार में बताया कि महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। यह पर्व हरेक वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सृष्टि का आरंभ अग्निलिंग जो महादेव का विशालकाय स्वरूपों के उदय से हुआ। मां बगलामुखी पीठ परिषद के संस्थापक एवं ज्योतिर्विद पंडित महेश मोहन झा ने बताया कि इस वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 15 फरवरी 2026 रविवार को दिन में 04 बजकर 35 मिनट से हो रहा है जो अगले दिन 16 फरवरी को संध्या 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।महाशिवरात्रि व्रत प्रदोष व्रत होता है एवं शिवरात्रि पूजन निशीथ काल में होता है अतः शास्त्र सम्मत महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाया जाएगा।
(महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त)-
*प्रथम प्रहर- संध्या 06:39 से 09:45 रात्रि तक।*
*द्वितीय प्रहर- रात्रि 09:45 से रात्रि 12:52 तक।*
*निशीथ काल- रात्रि 12:28 से रात्रि 01:27 तक।*
*तृतीय प्रहर- रात्रि 12:52 से रात्रि 03:59 तक।*
*चतुर्थ प्रहर- रात्रि 03:59 से 06:27 तक।*
(महाशिवरात्रि पूजा विधि)-
महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें फिर दिनभर उपवास में या फलाहार करें। शाम के समय घर में या शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल,दूध, दही, घी,शहद, शक्कर से अभिषेक करें फिर शिवलिंग पर आक, धतूरा एवं कनेर पुष्प अर्पित कर तीन पत्ती वाला बेलपत्र एवं शमी पत्र चढ़ाएं फिर ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप यथासंभव करके आरती करें और रात्रि जागरण कर भजन कीर्तन करें एवं अगले दिन सुबह पारण करें। धर्मसम्राट आचार्य विश्वपति शुक्ल ने बताया कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है- धार्मिक शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी की रात भगवान शिव एक तेजस्वी शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। ज्योतिष के अनुसार इस तिथि पर चंद्रमा और सूर्य दोनों पास होता है। इसे जीवन और चेतन के मिलन का प्रतीक माना जाता है। एक मान्यता यह भी है कि सृष्टि की शुरुआत इसी रात भगवान शिव ने निराकार रूप से साकार रूप में अवतार लिया था, यानी इसी दिन शिव जी का रूद्र रूप प्रकट हुआ, जिससे सृष्टि में संतुलन बना। कुछ मान्यताओं के अनुसार प्रलय के समय भगवान शिव इसी दिन तांडव करते हैं और तीसरे नेत्र की अग्नि से ब्रह्मांड का संहार होता है। धार्मिक आस्था के अनुसार इसी दिन शिव और शक्ति का मिलन होता है जिसे सनातनी लोग शिव पार्वती विवाह के रूप में मनाते हैं। शिवरात्रि पर खास ज्योतिषीय योग- ग्रहों का यह संयोग महाशिवरात्रि के दिन बनना बेहद दुर्लभ माना जाता है,जिसका असर सभी राशियों पर पड़ेगा, हालांकि कुछ राशियों के लिए यह समय करियर,धन और रिश्तों के मामले में विशेष रूप से शुभ साबित हो सकता है। पंचांग के अनुसार सेनापति मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे, वहीं चन्द्र मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसके अलावा रात में बुध पूर्वभाद्र नक्षत्र में गोचर करेंगे एक ही दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल बदलना अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है इसका शुभ असर वृष, कर्क एवं तुला राशि वाले जातकों को विशेष लाभ देगा।
(महाशिवरात्रि पर करें उपाय)
धन समृद्धि हेतु- शिवलिंग पर जल,दूध, दही घी शहद शक्कर और गन्ने के रस से अभिषेक करके सात काली मिर्च और काले तिल चढ़ाएं। शत्रु नाश- सरसों तेल से अभिषेक करें। शीघ्र विवाह हेतु- गाय के कच्चे दूध और तिल मिश्रित जल से अभिषेक करें एवं माता पार्वती को सिंदूर चूड़ियां अर्पित करें। रोग मुक्ति-महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें।
