गौरवशाली विरासत के 76 वर्ष: चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय के संस्थापक दिवस समारोह का भव्य आयोजन

चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय के 76वें संस्थापक दिवस समारोह का आयोजन दिनांक 16 फ़रवरी 2026 को किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सत्यकाम थे और विशिष्ट अतिथि कायस्थ पाठशाला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश की सेवा निवृत्त अपर निदेशक डॉ सुधा प्रकाश उपस्थित थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कायस्थ पाठशाला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात सरस्वती वंदना और महादेव प्रसाद जी की वंदना महाविद्यालय के संगीत विभाग के द्वारा प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान महाविद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका प्रो सरोज सिंह ने किया। साथ ही अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की इसी श्रृंखला में महाविद्यालय की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित करती हुई छायाचित्र प्रदर्शनी का भी उद्घाटन एवं अवलोकन अतिथियों के द्वारा किया गया। इसके माध्यम से महाविद्यालय के विकास और विरासत के 76 वर्षों के सफर को दर्शाते दुर्लभ छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। इसके बाद महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रेरणा गीत, नृत्य और प्रयाग महात्म्य की प्रस्तुतियां शामिल थी।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रो अर्चना खरे के द्वारा चौधरी महादेव प्रसाद का जीवनवृत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद महाविद्यालय की वार्षिक आख्या प्राचार्य प्रो. अजय प्रकाश खरे ने प्रस्तुत की । अपने उद्बोधन में उन्होंने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, तथा समकालीन दौर मे आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं को रखा। उन्होंने कहा कि यह अवसर महाविद्यालय के 76 गौरवशाली वर्षों की विरासत को संजोने और पूज्य संस्थापक चौधरी बाबू महादेव प्रसाद को नमन करने का है जिनकी ईश्वरीय प्रेरणा से इस महाविद्यालय की स्थापना हुई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के शोध पत्र “रिसर्च कम्युनिकेशंस” के तीसरे वर्ष के दूसरे अंक का विमोचन हुआ जिसे इस बार प्रतिष्ठित क्रॉसरेफ़ डी.ओ.आई. की सदस्यता प्राप्त हो गई है। इसी क्रम में रसायन विभाग की पुस्तक “निओटेरिक एवोल्यूशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी” और डॉ दिलीप कुमार सिंह की पुस्तक “अर्थ” के विभिन्न अंकों का लोकार्पण भी हुआ।
इसके बाद 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि के द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान किए गए । साथ ही अवकाश प्राप्त शिक्षकों प्रो सत्यंवदा सिंह, प्रो आभा सिंह, प्रो जैबुनिशा, डॉ शशि बाला एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी श्रीमती लक्ष्मी को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में डॉ विशाल श्रीवास्तव एवं डॉ प्रिया सोनी खरे को उत्कृष्ट शिक्षक सेवा सम्मान प्रदान किया गया, वहीं शिक्षणेत्तर कर्मचारी श्री मयंक श्रीवास्तव, श्री देवांश श्रीवास्तव, श्री अरविंद अग्रहरि एवं श्री जितेंद्र कुमार यादव को भी उत्कृष्ट सेवा सम्मान दिया गया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में, मुख्य अतिथि प्रो. सत्यकाम ने अपने वक्तव्य में कहा कि चौधरी महादेव प्रसाद जी ने जिस दूरगामी सोच के साथ इस महाविद्यालय की नीव रखी, उसी से प्रेरणा लेकर सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को भी अगले 21 वर्षों में अपने विश्वविद्यालय के विकास के लिए अथक प्रयास जारी रखना चाहिए, अगर सभी मिलकर ऐसा करेंगे तो विकसित भारत संकल्प-2047 को साकार करने में महाविद्यालय का योगदान महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद विशिष्ट अतिथि डॉ सुधा प्रकाश ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाविद्यालय का शिक्षा के क्षेत्र में सतत योगदान अविस्मरणीय है और शिक्षा से ही हम नए भारत का निर्माण कर सकते है। तदोपरांत चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में महाविद्यालय के गौरवशाली परंपरा को रेखांकित किया और समाज के विकास एवं राष्ट्र निर्माण में महाविद्यालय के योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम में मंच संचालन प्रो आभा त्रिपाठी ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रो भावना चौहान, समन्वयक, संस्थापक दिवस समारोह ने किया।
कार्यक्रम के दौरान कायस्थ पाठशाला के महामंत्री सुनील दत्त कौटिल्य एवं उपाध्यक्ष वित्त श्री वी एस लाल, पूर्व प्राचार्य प्रो के सी श्रीवास्तव, प्रो वी के सिन्हा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो हर्ष कुमार, प्रो अनामिका राय सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
