*चलती ट्रेन में दीया जलाने वाले यात्री के खिलाफ मध्य रेल की कड़ी कार्रवाई*
*ट्रेनों में ज्वलनशील वस्तुएं ले जाना/जलाना अपराध है — दोषी को जुर्माना और 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान*
मुंबई श्रीकेश चौबे:-
मध्य रेल ने चलती ट्रेन के अंदर दीया जलाकर यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले एक यात्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
31 अगस्त 2026 को भुसावल के वाणिज्यिक नियंत्रण कक्ष से सूचना प्राप्त हुई कि ट्रेन संख्या 12782 (हज़रत निजामुद्दीन–मैसूर एक्सप्रेस) के कोच संख्या A-1 की बर्थ नंबर 17 पर एक यात्री दीया जलाकर पूजा कर रहा है।
इस मामले की सूचना ड्यूटी पर तैनात टिकट जांच कर्मचारी श्री रमन कुमार शर्मा, खंडवा ने दी। आवश्यक कार्रवाई के लिए यात्री को भुसावल रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारा गया।
पूछताछ के दौरान यात्री की पहचान 55 वर्षीय गरिबा, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश के रूप में हुई। यात्री ने बताया कि उसने शाम की प्रार्थना करते समय अपनी आरक्षित बर्थ पर दीया जलाया था।
ड्यूटी पर तैनात टीटीई ने यात्री को दीया बुझाने की सलाह दी और समझाया कि खुली लौ से आग लग सकती है तथा इससे यात्रियों और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, यात्री ने प्रार्थना पूरी होने के बाद ही दीया बुझाने पर जोर दिया। टीटीई ने इस घटना का अपने मोबाइल फोन से वीडियो भी रिकॉर्ड किया।
मौके से एक माचिस की डिब्बी, पीतल का दीया तथा एक स्टील का कंटेनर भी बरामद किया गया।
यात्रियों और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा उत्पन्न करने वाले इस कृत्य के संबंध में 01 सितंबर 2026 को रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 153 और 145(बी) के तहत आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 35(सी) के तहत नोटिस देकर छोड़ दिया गया।
मध्य रेल सभी यात्रियों से अपील करता है कि वे ट्रेनों के अंदर कोई भी ज्वलनशील वस्तु न ले जाएं और न ही दीया, मोमबत्ती या अगरबत्ती जलाएं। इस तरह की गतिविधियों से आग लग सकती है और हजारों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।
रेलवे एक्ट के तहत ऐसी हरकतें दंडनीय हैं:
धारा 145(B) के तहत रेलवे परिसर से हटाना, पास/टिकट ज़ब्त करना, 1,000 रुपये तक का जुर्माना और अगर चेतावनी के बावजूद अपराध जारी रहता है, तो 6 महीने तक की जेल या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। और
धारा 153 के तहत 5 साल तक की जेल हो सकती है।
