राजभाषा हिन्दी पखवाड़ा-2026 अंतर्गत
विधिक शिक्षा में राजभाषा हिन्दी का महत्व विषयक संवाद-संगोष्ठी हुई आयोजित

विधि विभाग के बेनीगंज परिसर में इलाहाबाद डिग्री कॉलेज(संघटक महाविद्यालय,इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के विधि विभाग द्वारा राजभाषा हिन्दी पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत ‘विधिक शिक्षा में राजभाषा हिन्दी का महत्व’ विषयक संवाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस विशेष आयोजन में विधि विभाग के विभागीय शिक्षकों ने उपरोक्त विषय पर संवाद किया अपने अनुभव साझा किया साथ ही साथ कई सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम का समन्वयन हिन्दी विभाग के आचार्य मार्तंड सिंह एवं विधि विभाग डॉ श्लेष गौतम,सदस्य-इलाहाबाद विश्वविद्यालय राजभाषा कार्यक्रम समिति ने किया।कार्यक्रम का संयोजन डॉ नेहा भारती एवं डॉ कृतिका सिंह ने संयुक्त रूप से किया तथा संचालन डॉ नेहा भारती का रहा।
विभागीय प्रभारी डॉ नीलम सिंह ने वक्ताओं का स्वागत करते हुए राजभाषा हिंदी के विकास और बिस्तार पर विशेष बल देने का अनुरोध किया।
डॉ श्लेष गौतम ने हिन्दी को संवैधानिक एवं व्यवहारिक संदर्भ से जोड़ते हुए आम जनमानस की भाषा बताया और इसीलिए विधि के छात्र-छात्राओं से सहज सरस संवाद का सर्वश्रेष्ठ माध्यम बताया।
डॉ चंद्रनाथ सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
वक्ताओं के विचार:
डॉ पवन कुमार ने हिन्दी भाषा को अधिकार और सर्व सुलभ न्याय की भाषा बताया तो वहीं डॉ पंकज रावत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का संदर्भ लेते हुए हिन्दी को आम जनमानस की भाषा बताते हुए इसके अधिकाधिक प्रयोग पर विशेष बल दिया जिससे छात्र-छात्राओं की समझ विधि के प्रति सहज रूप से विकसित हो।
डॉ गिरिजेश कुमार सिंह ने हिन्दी को हमारी न्याय व्यवस्था की आधारभूत भाषा बताते हुए कहा की आम और औसत बुद्धि का जो व्यक्ति है उसके लिए न्याय का मार्ग तभी प्रशस्त होगा जब उसकी अपनी भाषा यानी राजभाषा हिंदी में संवाद होगा। और इसलिए पाठ्य पुस्तकों का अधिक से अधिक हिन्दी में प्रकाशन और शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं से राजभाषा में संवाद उचित होगा।
डॉ आकाश राम ने उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के बहुत से संदर्भ देते हुए न्याय और शिक्षा की भाषा हमारी राजभाषा हिन्दी है ऐसा कहा।
दो चंद्रनाथ सिंह ने पठन-पाठन में मूट कोर्ट अर्थात छद्म न्यायालय का संदर्भ देते हुए उसमें अधिकाधिक हिन्दी के प्रयोग की बात कही ताकि छात्र-छात्राएं पहले से ही राजभाषा के प्रयोग उपयोग एवं इसकी व्यावहारिकता को समझ सकें।
डॉ स्वाति ने विशेष कर पारिवारिक विधियों के संदर्भ में हिन्दी भाषा के प्रयोग और समझ के विकसित होने पर संवाद किया और स्वभाषा के स्वाभिमान की बात की।
डॉ अनामिका सिंह ने राजभाषा हिन्दी के मातृभाषा के संदर्भ रेखांकित करते हुए विधि शिक्षा में इसके निरंतर प्रयोग पर अपनी बात रखी।।
इस अवसर पर डॉ मुक्ति जायसवाल,डॉ किरन सिंह,डॉ अजय गुप्ता,डॉ हरीश तिवारी,डॉ राष्ट्र गौरव,डॉ पंकज कुमार,डॉ धीरेंद्र विक्रम सिंह,डॉ संदीप मिश्रा,प्रशांत कुमार गोंड,धीश गुसिया की उपस्थिति रही।
