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युवा संवाद एवं विकसित भारत – 2047’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

युवा संवाद एवं विकसित भारत – 2047’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन

हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं उन्मेष, प्रज्ञा-प्रवाह, काशी प्रांत के संयुक्त के तत्वावधान में 9 सितम्बर 2026, बुधवार, अपराह्न 3ः00 बजे एकेडेमी स्थित गाँधी सभागार में ‘युवा संवाद एवं विकसित भारत – 2047’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शाॅल देकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, निदेशक – जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागाराज ने कहा कि ‘देश के युवाओं के अपने सपने होते हैं और देश का सामूहिक स्वप्न है कि 2047 तक विकसित भारत की ओर अग्रसर हों। देश की युवा शक्ति, ज्ञान, कौशल, नवाचार और नेतृत्व के माध्यम से देश को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। युवाओं के विचार, सकारात्मक सहभागिता और रचनात्मक ऊर्जा को राष्ट्रनिर्माण से जोड़कर ही विकसित भारत – 2047’ की संकल्पना की जा सकती है।’ संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. के. बी. पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष, लोक सेवा आयोग उ0प्र0, प्रयागराज ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047 के लिए वैश्विक अनुभव, उच्च शिक्षा, शोध और भारतीय भाषाओं का समन्वय आवश्यक है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में विश्व से सीखते हुए भारतीय दृष्टि और मूल्यों को सुदृढ़ करना होगा। अनुभव आधारित शिक्षा, शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग से भारत आत्मनिर्भर, ज्ञानसम्पन्न और विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बन सकता है।’ संगोष्ठी की मुख्य अतिथि प्रो. कुमुद शर्मा कुुलपति महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से समृद्ध भारत का सपना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति, मातृभाषा और मानवीय मूल्यों से जुड़ा हुआ आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत बनाने का संकल्प है। जब युवा आधुनिक ज्ञान और विश्व की भाषाओं को सीखते हुए अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहेंगे, तभी भारत का विकास अपनी मौलिक पहचान के साथ होगा। सही विचार, स्पष्ट दृष्टि और सृजनात्मक सोच ही विकास को सार्थक दिशा देती है। जिस प्रकार लकड़ी हर कोई काट सकता है, लेकिन उसे उत्कृष्ट कलाकृति में वही बदल सकता है जिसके पास सही दृष्टि और कौशल हो, उसी प्रकार 2047 का विकसित भारत केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दूर दृष्टि, संस्कार, स्वाभिमान, करुणा और रचनात्मक प्रतिभा से निर्मित होगा।’ संगोष्ठी के मुख्य वक्ता चंद्रकांत जी, अखिल भारतीय सह-संयोजक, उन्मेष प्रज्ञा-प्रवाह ने कहा कि ‘भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिये हमें गाँवों में जाकर उनके उत्थान के लिये पाँच मुख्य आवश्यक अवश्यकताओं को पूरा करना होगा। संसार से कनेक्ट करने के लिये सड़क, रहने के लिये घर, स्वच्छ एवं ताजा भोजन, वौद्धिक एवं तकनीकी शिक्षा और उत्तम जीवन यापन के लिये स्वस्थ्य है। कोई भी देश सामरिक क्षमता और आर्थिक क्षमता को नज़र अंदाज नही ंकर सकता क्योंकि यह आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा को दर्शाता है। ’ कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अरूण कुमार वर्मा, महानगर संयोजक, प्रज्ञा-प्रवाह, प्रयगाराज ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संजय सिंह, उ0प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्धानों में संतोष त्रिपाठी (सह संयोजक, काशी प्रांत) श्री मनोज तिवारी (सदस्य मंडल कार्यकारी विन्ययाचल मंडल), डाॅ. अरूण कुमार वर्मा, डाॅ. मनीष कुमार सिंह (सी.एम.पी.), डाॅ. सुभाष चंद्र (सह संयोजक महानगर, प्रयागराज), प्रो. सतीश सिंह (आई.आई.आई टी.), डाॅ. हरीश पटेल डाॅ. कुँवर शेखर (युवा आयाम), प्रो. भावना चैहान, हिन्दी विभाग सी.एम.पी. डिग्री कालेज, डाॅ. सुनीता सिंह, डाॅ. संध्या सिंह, डाॅ. कीर्ति सिंह, शनि शर्मा भट्ट (युवा आयाम), डाॅ. व्रहोश शुक्ल, श्री प्रसून तिवारी (आयोजन सचिव), आकाश तिवारी, एम. एस. खान., वजीर खान सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

 

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