*इक़बाल माहिर व तशना कानपूरी ने शायरी मेयार को बुलन्दी बख्शी* (इसरार नियाज़ी)
*कवि सम्मेलन व मुशायरा में दिखी क़ौमी यकजहती और उर्दू ज़बान की मिठास* (रौनक़ गुप्ता)
*बज़्म ए अहबाब की बुनियाद तशना कानपूरी ने रख कर नई पीढ़ी के शायरों को दिया नया आयाम* (बख्तियार युसूफ)

प्रयागराज:- बज़्म ए अहबाब संस्था के संस्थापक स्व शाकिर हुसैन तशना कानपूरी की याद में करैली स्थित अदब घर में जहां कवियों शायरों ने अपनी रसधार पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया वहीं अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से हंसाया गुदगुदाया तो भारतीय सभ्यता और समाज को जागरुक भी किया।कवि सम्मेलन व मुशायरा में कौमी यकजहती की झलक भी देखने को मिली।मुख्य अतिथि सिविल डिफेंस के डिविजनल आफिसर रौनक गुप्ता का बज़्म ए अहबाब के संस्थापक सदस्य शाकिर हुसैन तशना के बेटे व वर्तमान अध्यक्ष अमजद हुसैन रावी ने बुके भेंट कर व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।इसरार नियाज़ी की अध्यक्षता व बख्तियार युसूफ के संचालन में शायराना महफ़िल के उपरांत पांच लोगों को स्व तशना कानपूरी सम्मान से सम्मानित किया गया तो अन्य दस लोगों को बज़्म ए अहबाब संस्था का प्रशस्ति-पत्र देकर उनका उत्साह वर्धन किया गया।शायर असलम इलाहाबादी,फरमूद इलाहाबादी,वाक़िफ अंसारी,डॉ क़मर आब्दी, डॉ मोहम्मद शाहिद खान,असलम निज़ामी,सुनील दानिश, डॉ राहुल शुक्ला,राम लखन चौरसिया,शाहिद सफर,सुहैल अख्तर व कार्यक्रम आयोजक अमजद हुसैन रावी ने बेहतरीन अशआरो व उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा।रौनक गुप्ता ने कहा बड़ों का सानिध्य और उनका सम्मान करना ही हमें सभ्य समाज की पंक्ति में खड़ा करता है तब जाकर वह सम्मान हासिल करने के क़ाबिल होता है।अन्य सभी वक्ताओं ने इक़बाल माहिर व शाकिर हुसैन तशना की शायरी व उर्दू अदब के लिए किये योगदान की सराहना की। इसरार नियाज़ी ने कहा इक़बाल माहिर व तशना कानपूरी ने अपनी शायरी मेयार को जो बुलनदी बख्शी वह आज के दौर के शायरों के लिए मोतियों में पिरोकर बड़े ही सलीके से सम्हालने की ज़रुरत है।आयोजक अमजद हुसैन रावी व सुहैल अख्तर ने आए हुए सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम में आसिफ उस्मानी,शहाब हनफी,मोईन हबीबी,असद कुरैशी, सैय्यद मोहम्मद अस्करी,असद हुसैन ताबी, महमूद खान, मोहम्मद शारिक़ आदि
