*हिंदी दिवस पर हिंदी के संवर्धन हेतु संगोष्ठी एवं विचार-विमर्श*
हिंदी ही भारत माता के माथे की बिंदी कहलाती है।”

लूकरगंज, प्रयागराज।
विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत’ के तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी एवं विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने हिंदी भाषा के निरंतर संवर्धन, वैश्विक प्रसार और दैनिक जीवन में इसके बढ़ते प्रयोग पर विस्तार से मंथन किया।
अभिव्यक्ति एवं काव्य पंक्तियाँ
आत्मा और संवेदना की भाषा:
ट्रस्ट के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी साकिब सिद्दीकी ‘बादल’ ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
”हिंदी केवल हमारी अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की भाषा है। जब मीडिया और समाज संवेदनशीलता तथा ईमानदारी के साथ हिंदी में संवाद स्थापित करते हैं, तो समाज में सांस्कृतिक चेतना और मूल्यबोध का विस्तार होता है। हिंदी ही वह डोर है जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोकर हमारी पहचान को वैश्विक मंच देती है।”
युवा पीढ़ी से जुड़ाव और डिजिटल युग:
ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राहुल शुक्ल ‘साहिल’ ने विचार व्यक्त करते हुए कहा:
”आज आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी को हिंदी के समृद्ध साहित्य एवं डिजिटल माध्यमों में हिंदी के उपयोग के प्रति जागरूक और प्रेरित किया जाए। यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा से जोड़े रखेंगे, तभी हिंदी तकनीकी और सांस्कृतिक दोनों धरातल पर विश्व पटल पर सर्वोच्च शिखर प्राप्त करेगी।”
संध्या कनौजिया ‘श्रीजी’ (अध्यक्ष, युवा चेतना शक्ति):
”हर दिल की धड़कन में हिंदी का नाम हो,
हमारी पहचान और सम्मान ही हिंदी का काम हो।”
साधना गुप्ता (प्रदेश सचिव, विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत):
”संस्कृति की जो संवाहक है, जन-जन की वो भाती है, हिंदी ही भारत माता के माथे की बिंदी कहलाती है।”
विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता का संकल्प संगोष्ठी में सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकला कि साहित्य, जनसंचार, डिजिटल तकनीक और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता देकर ही भाषा की असली बढ़ोतरी संभव है। उपस्थित सभी वक्ताओं ने दैनिक जीवन में हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग का संकल्प लिया।
उपस्थिति एवं शुभकामनाएं
कार्यक्रम में मुख्य रूप से दीप किशन कनौजिया, सरजीत गौतम, पूनम मिश्रा, विनीत तिवारी, प्रीति श्रीवास्तव, अर्चना, आरती गुप्ता,पूजा, अन्नू विश्वकर्मा सहित कई साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी उपस्थित लोगों को गुलाब का फूल देकर विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
