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11वें आयुर्वेद दिवस का भव्य आयोजन आयुर्वेद मात्र प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति ही नहीं सम्पूर्ण जीवन दर्शन- बी के सिंह

11वें आयुर्वेद दिवस का भव्य आयोजन

आयुर्वेद मात्र प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति ही नहीं सम्पूर्ण जीवन दर्शन- बी के सिंह

आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा की जीवंत धरोहर – योगेन्द्र प्रताप सिंह

सामुदायिक भलाई एवं सतत जीवन के लिए उपयोगी है आयुर्वेद – डॉ तोमर

प्रयागराज: आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आज 15 सितम्बर को गोबिंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज में 11वाँ आयुर्वेद दिवस पूर्ण भव्यता से मनाया गया । इस अवसर पर प्रयागराज के पूर्व कमिश्नर श्री बी के सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने की । आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो.(डॉ) जी एस तोमर ने प्रमुख वक्ता के रूप में उद्बोधन दिया । मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में बी के सिंह ने कहा कि आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति ही नहीं सम्पूर्ण जीवन दर्शन है । इसमें उपलब्ध जड़ी बूटियाँ निरापद एवं प्रभावी होती हैं । गाँवों की प्राकृतिक स्थिति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने नैसर्गिक जीवन पर अपने अनुभवों को साझा किया । डॉ तोमर ने अपने उद्बोधन में 11वें आयुर्वेद दिवस के थीम “एक स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद”(आयुर्वेद फॉर ए हैल्दी टुमारो) को विस्तार पूर्वक बताया । इस वर्ष आयुर्वेद दिवस के तहत मुख्य रूप से बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल, आयुर्वेद में साक्ष्य, अनुसंधान एवं नवाचार एवं सामुदायिक भलाई एवं सतत जीवन के लिए आयुर्वेद इन तीन उप विषयों पर जोर दिया गया है । 23 सितम्बर को आयुर्वेद मनाने के निर्णय का मंतव्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि 23 सितम्बर को दिन व रात बराबर होते हैं । अत: इस दिन को “ईक्वीनॉक्स” कहा गया है । चूँकि आयुर्वेद भी दोष धातु मल एवं अग्नि के सन्तुलन की बात करता है । इसी लिए माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने इसी दिन को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है । इसीलिए 11वाँ आयुर्वेद दिवस 23 सितम्बर को विश्व भर में मनाया जाएगा । डॉ वीएन त्रिपाठी ने आयुर्वेद को आज की ज़रूरत बताते हुए इसकी उपयोगिता पर अपने अनुभव साझा किए । डॉ रघुवंशी ने आहार, निद्रा व ब्रह्मचर्य तीन उपस्तंभों को स्वस्थ जीवन की कुंजी बताया । अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान परम्परा की जीवंत धरोहर बताया । आयुर्वेद के समग्रता मूलक सिद्धांतों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद क्रूडोपैथी में विश्वास करता है । पेड़ पौधों से बनी औषधियों के आइसोलेटेड एक्टिव प्रिंसिपल्स निरापद न होकर हानिकारक प्रभाव डालते हैं । भस्मों से बनी औषधियों को उन्होंने नेनो टेक्नोलॉजी के उदाहरण से समझाया । उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा कोई पुस्तक नहीं । शिक्षा एवं समाज के क्षेत्र में प्रचलित ज्ञान, विज्ञान, कला, संगीत, ज्योतिष, गणित आदि के प्रति भारतीय सोच ही भारतीय ज्ञान परम्परा है । इस पर हमें गर्व होना चाहिए । इस अवसर पर डॉ तोमर ने संस्थान के निदेशक डॉ सिंह को इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में सम्मिलित धातु विज्ञान पर अपने सहयोगी डॉ राज शेखर पाण्डेय की लिखित पुस्तक एवं आरोग्य भारती की मासिक पत्रिका आरोग्य सम्पदा की प्रति भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र के पुस्तकालय के लिए भेंट की । कार्यक्रम में डॉ ए के त्रिपाठी, डॉ सुभाष राय, डॉ रंजना त्रिपाठी, राजेन्द्र कुमार सिंह, अनुराग अष्ठाना, अंकुर सिंह, राम सिंह सहित संस्थान के प्राध्यापक, छात्र एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे । अंत में राजेन्द्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया । अनुराग अष्ठाना ने शांति मंत्र एवं राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन किया ।

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