विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस पर विशिष्ट व्याख्यान
एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण स्वास्थ्य जरूरी- डॉ तोमर

आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन की सतत व्याख्यानमाला के अन्तर्गत विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आज दि. 26 सितम्बर को श्री रामहर्षण चिकित्सा निलयम्, त्रिवेणीपुरम्, प्रयागराज में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ जी एस तोमर ने विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस (वर्ल्ड एववायरनमेंटल हैल्थ डे) के अवसर पर अपने उद्बोधन में बताया कि विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस
हर साल 26 सितंबर को मनाया जाता है । यह दिन मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरे और अटूट संबंध के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2011 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ (आईईएफएच) द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाना, जैसे कि स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी, और उचित कचरा प्रबंधन है । यह इस बात पर जोर देता है कि एक स्वस्थ पर्यावरण के बिना मानव का स्वस्थ रहना असंभव है।
आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य धरोहर है । इसमें “लोक पुरुष साम्य” (कंसेप्ट ऑफ मेन कम एनवायरनमेंट) की परिकल्पना है । इसके अनुसार मानव के समग्र स्वास्थ्य की परिकल्पना पशु पक्षी एवं पर्यावरण स्वास्थ्य के बिना अधूरी है । इस संकल्पना का वैज्ञानिक आधार भी है । आयुर्वेद के अनुसार समस्त ब्रह्माण्ड सूर्य, चन्द्रमा (जल) एवं वायु तीन महा शक्तियों द्वारा प्रत्यक्षत: प्रभावित होता है । मानव सहित सभी जीवधारियों के अन्दर इन महा शक्तियों के प्रतिनिधि स्वरूप वात, पित्त एवं कफ़ रहते हैं । यही कारण है कि ब्रह्माण्ड में हुए सूक्ष्म परिवर्तन भी जीवधारियों को सीधे प्रभावित करते हैं । अत: हमें स्वस्थ रहने के लिए अपने पर्यावरण को भी स्वस्थ रखना होगा । पर्यावरण प्रदूषण आज की सबसे गंभीर समस्या है । जंगलों की अंधाधुंध कटाई, कल कारख़ानों से निकलता ज़हरीला धुंआ तथा सुरसा के मुख की तरह बढ़ रहे वाहनों के ध्वनि एवं वायु प्रदूषण से पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इन विषम परिस्थितियों में हमारा दायित्व अति महत्वपूर्ण है ।
दुनिया में प्रति व्यक्ति वृक्षों का औसत लगभग 400 से 422 पेड़ प्रति व्यक्ति है, जबकि भारत में प्रति व्यक्ति वृक्षों की संख्या काफी कम होकर लगभग 24 से 28 पेड़ प्रति व्यक्ति है। इस स्थिति में पौधारोपण निश्चित ही आज की महती आवश्यकता है । स्कंद पुराण में उन वृक्षों का नाम बताया गया है जो 70 से 100 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड को शोषित करने की क्षमता रखते हैं । इसमें कहा गया है की पीपल, बरगद, नीम का एक एक पेड़, इमली के दस पेड़, बेल, केंथ और आँवला के तीन तीन पेड़ तथा आम के पाँच पेड़ लगाने वाले व्यक्ति को कभी नरक का दर्शन नहीं होता अर्थात् स्वर्ग की प्राप्ति होती है । यही नहीं हमारे धर्म शास्त्रों में दस पुत्रों से अधिक पुण्य एक वृक्ष को लगाने से मिलता है । इसी के दृष्टिगत यह कहा जा सकता है कि एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण स्वास्थ्य बहुत जरूरी है । कार्यक्रम के अंत में आरोग्य भारती के सक्रिय सदस्य एवं सुदर्शन आयुर्वेद केन्द्र के निदेशक राजेन्द्र कुमार सिंह ने डॉ तोमर को अति महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए आभार जताया एवं शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया ।

