विश्व हृदय दिवस पर विशिष्ट व्याख्यान
अर्जुन क्षीरपाक हृदय स्वास्थ्य के लिए संजीवनी – डॉ जी एस तोमर

आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन की सतत व्याख्यानमाला के अन्तर्गत विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर आज दि. 28 सितम्बर को श्री रामहर्षण चिकित्सा निलयम्, त्रिवेणीपुरम्, प्रयागराज में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो (डॉ) जी एस तोमर ने अपने उद्बोधन में बताया कि विश्व हृदय दिवस प्रतिवर्ष 29 सितम्बर को मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य हृदय रोगों और उनके बचाव के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है। विश्व हृदय दिवस 2026 की थीम “डोंट मिस ए बीट” है। हिंदी में इसका अर्थ “दिल की धड़कन न चूकें” है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि हृदय रोग अक्सर चुपचाप या बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित हो सकते हैं। अत: लोगों को शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, हृदय-स्वस्थ आदतें अपनाने और समय पर मेडिकल जांच कराने के लिए जागरूक रहना चाहिए ।
इस वैश्विक पहल का उद्देश्य हृदय रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से निपटने के लिए निवारक उपायों को बढ़ावा देना है। हृदय रोग दुनिया भर में मृत्यु दर का प्रमुख कारण है, और यह दिन हृदय स्वास्थ्य के महत्व के महत्वपूर्ण अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है। कार्डियोवैस्कुलर बीमारी एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट है, जो सालाना 20.5 मिलियन से अधिक लोगों की जान लेता है। दिल के दौरे, स्ट्रोक और दिल की विफलता जैसी स्थितियां इन मौतों के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। वास्तव में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां दुनिया भर में मृत्यु दर का प्रमुख कारण हैं, जो सभी वैश्विक मौतों का लगभग 31% है। दिल का दौरा, स्ट्रोक और कोरोनरी हृदय रोग सबसे आम दोषियों में से हैं। विश्व हृदय दिवस की अवधारणा विश्व हृदय संघ के पूर्व अध्यक्ष एंटोनी बाई डी लूना द्वारा पेश की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से, विश्व हृदय दिवस आधिकारिक तौर पर 1999 में स्थापित किया गया था। पहला आधिकारिक उत्सव 24 सितंबर, 2000 को हुआ था। एक दशक से अधिक समय से, विश्व हृदय दिवस सितंबर के अंतिम रविवार को मनाया जाता था। 2012 में, वैश्विक नेताओं ने कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों सहित गैर-संचारी रोगों के कारण मृत्यु दर को कम करने की तात्कालिकता को मान्यता दी। उन्होंने 2025 तक इन मौतों को 25% तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस मिशन को प्राप्त करने के लिए, विश्व हृदय दिवस को 29 सितंबर की अपनी वर्तमान तारीख में स्थानांतरित कर दिया गया था। 90 से अधिक देश अब कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान और कार्यक्रमों के आयोजन में भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि हृदय रोग एक महत्वपूर्ण विकृत जीवनशैली जन्य रोग है । इसके साथ साथ यह एक मनोदैहिक रोग भी है । आयुर्वेद मतानुसार चिंता, शोक आदि मानसिक तनाव जन्य कारणों से शरीर गत दोष क्रुद्ध होकर हृदय से सम्बंधित स्रोतसों में व्याप्त होकर हृदय रोगों की उत्पत्ति करते हैं । यही नहीं आयुर्वेदीय मत से हृदय रोग के साथ साथ सभी विकृत जीवनशैली जन्य रोगों का मूल कारण मिथ्या आहार विहार है । पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से हमारे बच्चे एवं युवा आज हमारी पारम्परिक खाद्य संस्कृति से विमुख होकर पिज़्ज़ा, नूडल्स, पास्ता एवं बर्गर की चपेट में आ गये हैं । इसी का दुष्परिणाम आज नए नए रोगों के रूप में सामने आ रहा है । मैदा से बने खाद्य पदार्थ, एक बार से अधिक प्रयोग किया जाने वाले घी तेलों का ट्रांस फ़ैट एवं रिफाइण्ड तेलों का प्रयोग हृदय रोगों का प्रमुख कारण है । मोटा अनाज (श्री अन्न), सरसों व मूँगफली का तेल व रेशेदार फल-सब्ज़ी व अन्न पान के नियमित प्रयोग से हृदय रोग से बचा जा सकता है । नियमित योगाभ्यास एवं विश्रांतिकर योगासन हृदय को स्वस्थ रखते हैं । प्रवेक नेचरल्स द्वारा निर्मित कोल्ड प्रैस यलो मस्टर्ड ऑयल इससे बचाव के लिए अत्यंत उपयोगी है । इसके अलावा अर्जुन वृक्ष की छाल के चूर्ण को गाय के दूध में पकाकर बनाया गया क्षीर पाक हृदय के स्वास्थ्य के लिए संजीवनी है । स्वस्थ व्यक्ति भी आपाधापी भरी तनाव पूर्ण आज की स्थिति में 5 से 10 ग्राम अर्जुन की छाल से बनाए चूर्ण को 1 कप गाय का दूध एवं 1 कप पानी मिलाकर उबालकर आधा शेष रहने पर पियें । यह हृदय के लिए सर्वोत्तम टॉनिक है । इसके अलावा अर्जुन की चाय एवं कैप्सूल भी आजकल बाजार में उपलब्ध हैं । जिनका प्रयोग इस हेतु किया जा सकता है । कार्यक्रम के अंत में आरोग्य भारती के सक्रिय सदस्य एवं सुदर्शन आयुर्वेद केन्द्र के निदेशक राजेन्द्र कुमार सिंह ने डॉ तोमर को अति महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए आभार जताया एवं शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया ।
