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गोरेगांव में झुग्गी पुनर्विकास घोटाला 200 की जगह 900 झुग्गियां दिखाई गईं; डेवलपर और SRA अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज

गोरेगांव में झुग्गी पुनर्विकास घोटाला

200 की जगह 900 झुग्गियां दिखाई गईं; डेवलपर और SRA अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज
मुंबई श्रीकेश चौबे:-

गोरेगांव (पूर्व) में जनरल अरुणकुमार वैद्य मार्ग पर स्थित दुर्गादेवी चाल में SRA (झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण) प्रोजेक्ट को लेकर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि वहां असल में सिर्फ़ 200 झुग्गियां थीं, लेकिन उनकी संख्या बढ़ाकर 800 से 900 दिखाई गई। कोर्ट के आदेश के बाद, निर्मल नगर पुलिस स्टेशन में 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें SRA के सक्षम अधिकारी, डेवलपर, कंपनी के डायरेक्टर और सोसाइटी के पदाधिकारी शामिल हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि झुग्गियों की संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की गई।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई ठाणे के रहने वाले एयर इंडिया के रिटायर्ड कर्मचारी कोचरलाकोटा जगन्नाथराव की शिकायत पर और कोर्ट के निर्देश के पालन में की गई है।

शिकायत में दावा: 1996 और 2007 के बीच झुग्गियों की संख्या 200 से बढ़कर 800-900 हो गई

‘एनेक्शर-दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ का आरोप

कोर्ट के आदेश के बाद निर्मल नगर पुलिस की कार्रवाई; 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

इसमें डेवलपर, डायरेक्टर और सोसाइटी के पदाधिकारी शामिल हैं

दुर्गादेवी चाल सोसाइटी जनरल अरुणकुमार वैद्य मार्ग पर लगभग 191,457 वर्ग मीटर जमीन पर स्थित है; शिकायत में कहा गया है कि 1996 में इस जगह पर लगभग 200 झुग्गियां थीं। आरोप है कि बाद के सर्वे में झुग्गियों की संख्या बढ़ी हुई दिखाई गई। इन धाराओं के तहत दर्ज अपराध

निर्मल नगर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 166(A), 217, 218, 409, 420, 463, 468 और 120(B) के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ये दस्तावेज़ SRA को सौंपे गए थे।

शुरुआत में 300 झोपड़ियाँ दिखाई गई थीं। 1997 में हुए एक सर्वे में लगभग 500 झोपड़ियाँ दर्ज की गईं। आरोप है कि 2007 तक इस संख्या को बढ़ाकर 800 से 900 झोपड़ियाँ कर दिया गया। इस दौरान, संबंधित डेवलपर ने कथित तौर पर जाली दस्तावेज़ तैयार किए—जिनमें झोपड़ी में रहने वालों की सहमति पत्र, शपथ-पत्र और सोसाइटी के प्रस्ताव शामिल थे।

**दस्तावेज़ों में हेरफेर का आरोप**

शिकायत में आरोप है कि 1996 और 2007 के बीच, संबंधित पक्षों ने मिलीभगत करके झोपड़ियों की संख्या को वास्तविक गिनती से ज़्यादा दिखाया और इसके समर्थन में झूठे दस्तावेज़ बनाए। खबरों के अनुसार, इन दस्तावेज़ों में तीन ‘एनेक्शर-2’ (Annexure-2) सूचियाँ, झोपड़ी में रहने वालों के सहमति पत्र और शपथ-पत्र, तथा सोसाइटी के प्रस्ताव शामिल थे।

**कोर्ट का रुख करना**

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले को लेकर SRA के सक्षम अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालाँकि, जब कोई जाँच नहीं हुई, तो वे कोर्ट गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि कोर्ट ने 2 अप्रैल को मामला दर्ज करने का आदेश दिया और इस आदेश के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू हो गई है।

शिकायत में बताया गया है कि संबंधित अवधि के दौरान, SRA के डिप्टी कलेक्टर ने तीन ‘एनेक्शर-2’ दस्तावेज़ तैयार किए थे। इन दस्तावेज़ों में सर्वे के आधार पर झोपड़ियों की संख्या दर्ज की गई थी। इस बीच, दुर्गादेवी चाल प्रोजेक्ट का विकास शुरू में डेवलपर ‘हरीश्री एंटरप्राइजेज’ द्वारा किया गया था। शिकायत में कहा गया है कि प्रोजेक्ट के विकास के अधिकार बाद में ‘डेवलपमेंट हाउसिंग’, फिर ‘जी. कंस्ट्रक्शन’ और अंत में ‘ज्योति बिल्डर्स’ के पास चले गए। वर्तमान में, इस प्रोजेक्ट का विकास ज्योति बिल्डर्स द्वारा किया जा रहा है।

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