नामांकित नगरसेवकों के चयन में शिवसेना-भाजपा में भिड़ंत
उल्हासनगर में ‘महायुति’ गठबंधन खत्म
मुंबई श्रीकेश चौबे:- उल्हासनगर महानगरपालिका में नामांकित नगरसेवकों के चयन को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच विवाद बढ़ गया है। चयन प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए, भाजपा ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि स्थानीय स्तर पर ‘महायुति’ खत्म हो गया है। पार्टी पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि वे अब सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे को कोई राजनीतिक सहयोग नहीं देंगे।
भाजपा का आरोप है कि नामांकित नगरसेवकों के चयन की प्रक्रिया के दौरान उनके दो उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिवसेना ने उम्मीद से ज्यादा-यानी पांच-उम्मीदवारों का चयन करवा लिया। इसी वजह से भाजपा ने शिवसेना के साथ अपना स्थानीय गठबंधन तोड़ने का फैसला किया।
भाजपा गट नेता राजेश वधारिया ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन सहयोगियों के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं रखा गया। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी इस पूरी प्रक्रिया के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाएगी।
विधायक कुमार ऐलानी ने भी शिवसेना के स्थानीय नेतृत्व पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान डॉ. शिदि के प्रचार में भाजपा ने पूरा सहयोग किया था। हालांकि.. ऐलानी ने दावा किया कि शिवसेना के कुछ नेताओं ने नदी किनारे ‘अंटालिया घाट’ पर विकास कार्यों सहित कई स्थानीय मुद्दों पर अलग रुख अपनाया था।
भाजपा ने साफ़ किया कि उसके सभी 37 नगर सेवक अब शिवसेना का विरोध करेंगे और विपक्ष की बेंच पर बैठेंगे।
नॉमिनेशन पेपर गलत तरीके से खारिज करने का आरोप
भाजपा नेता प्रदीप रामचंदानी ने आरोप लगाया कि प्रशासन पर दबाव के कारण उनके और कपिल अडसुल के नॉमिनेशन पेपर गलत तरीके से खारिज कर दिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में स्थानीय शिवसेना नेता कमलेश निकम, अरुण आशान, पप्पू कलानी और ओमी कलानी शामिल थे। वहीं, संबंधित शिवसेना नेताओं ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
