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सही निदान एवं नियमित इलाज से ठीक होंगे टीबी मरीज- प्रोफेसर जी एस शुक्ल

सही निदान एवं नियमित इलाज से ठीक होंगे टीबी मरीज- प्रोफेसर जी एस शुक्ल

 

रिपोर्ट:कुलदीप शुक्ला

मुक्त विश्वविद्यालय ने निक्षय दिवस पर किया पुष्टाहार किट का वितरणउ,त्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा के तत्वावधान में शुक्रवार को विश्व क्षयरोग उन्मूलन दिवस पर जागरुकता कार्यक्रम एवं निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विज्ञान विद्या शाखा के निदेशक प्रोफेसर जी एस शुक्ल ने क्षय रोग के कारण, उसके लक्षण तथा निवारण के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सरस्वती परिसर स्थित लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार में प्रोफेसर जी एस शुक्ल ने व्याख्यान देते हुए कहा कि टीबी एक पूर्णतः इलाज वाली बीमारी है जो सही निदान एवं नियमित इलाज के द्वारा ठीक हो सकती है। लोगों के बीच इसके भ्रम को लेकर जागरुकता विकसित करना आवश्यक है। प्रोफेसर शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार बहुत ही प्रशंसनीय कल्याणकारी कार्यक्रम एवं सुविधाएं आम जनता के लिए खासकर टीबी के मरीजों के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर निःशुल्क उपलब्ध करा रही हैं। लोगों के बीच यह जागरुकता उत्पन्न करनी होगी कि किसी भी स्वास्थ्य संशय की स्थिति में इन स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर अपनी जांच एवं निदान कराएं तथा चिकित्सक के सलाह के अनुसार पूर्ण चिकित्सा को अंगीकार करें।
निक्षय दिवस पर प्रोफेसर शुक्ल ने कई प्रतिभागियों की जिज्ञासा का समाधान किया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के युवाओं को जागरुक करते हुए उन्हें मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने की महत्ता के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें अपने-अपने गांव में टीबी मरीजों के बारे में पता लगाने, उन्हें जागरुक कर मरीज को समीपस्थ स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। उनसे यह भी अनुरोध किया कि यदि वे इसकी सूचना विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा देंगे तो विश्वविद्यालय उन्हें निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुंचाने में पूर्ण सहायता उपलब्ध करायेगा तथा इस कार्य हेतु उन्हें ’’निक्षय मित्र’’ के नाम से सम्बोधन प्रदान किया जायेगा।
प्रोफेसर शुक्ल ने कहा कि टीबी शरीर के विभिन्न भागों में हो सकती है। जैसे फेफड़े की टीबी, पेट की टीबी, दिमाग की टीबी तथा हड्डियों में भी टीबी हो सकती है। अपने स्थान के अनुसार यह रोग अपना लक्षण प्रकट करता है किंतु कुछ लक्षण सभी में विद्यमान रहते हैं। जैसे बुखार, शाम के समय शरीर का तापमान बढ़ जाना, थकान, वजन का कम होना, भूख में कमी आना तथा खांसी के साथ बलगम में खून का आना इत्यादि।
प्रोफेसर शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के कुशल मार्गदर्शन एवं कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह के निरंतर प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय इस तरह के सामाजिक सरोकार के कार्यक्रमों में जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर प्रोफेसर पी पी दुबे, डॉ देवेश रंजन त्रिपाठी, श्री जितेंद्र सिंह, डॉ भास्कर शुक्ला, डॉ शरद चंद्र राय, डॉ रीना कालिया एवं डॉ नीबू आर कृष्णन आदि उपस्थित रहे।

 

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