*माहे मोहर्रम के चाँद नमुदार होते ही शुरु हुआ मजलिस मातम और अज़ादारी का दौर*
*माहे मोहर्रम के चाँद नमुदार होते ही शुरु हुआ मजलिस मातम और अज़ादारी का दौर*
"""""""मोहर्रमुल हराम के चाँद देख कर महिलाओं ने तोड़ी सुहाग की चूड़ियां"""""
"""""""अज़ाखानों मे अलम नसब होते ही शिया समुदाय की औरतों व मर्दों ने रंगीन वस्त्र त्याग कर पहले काले लिबास""""'"
""""""""घरों की छतों गलियों और इमामबाड़ों के उपर लहराने लगे लाल हरे और स्याह परचम"""""""
ज़िलहिज्जा की 30 शनिवार को माहे मोहर्रम के चाँद की तसदीक़ हो गई इसी के साथ मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो मे हज़रत इमाम हुसैन सहित अन्य करबला के शहीदों की याद मे लोगों मे सोग मनाने का सिलसिला शुरु हो गया।इमामबाड़ो मे अलम ताबूत ताज़िया तुरबत हज़रत अली असग़र का झूला आबिदे बीमार का बिस्तर आदि सजा कर मजलिस मातम और गिरया ओ ज़ारी का सिलसिला भी शुरु हो गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी के मुताबिक़ रविवार को पहली मोहर्रम से 67 दिव...









