भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन,हास्य व्यंग की धारा में डूबते उतराते रहे श्रोता

न्याय विहार कॉलोनी,प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री वंदना शुक्ला की सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। तत्पश्चात आमंत्रित अतिथियों एवं रचनाकारों का स्वागत संस्थाध्यक्ष धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महामंत्री एडवोकेट रमेश चंद्र तिवारी ने किया तथा कवि सम्मेलन का संचालन डॉ श्लेष गौतम ने तथा अध्यक्षता कानपुर के कवि डॉ सुरेश अवस्थी ने किया।
रचनाकारों की पंक्तियां
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ज़िन्दगी जिस दिन से मेरी मुस्कुराने लग गयी
ज़हनियत लोगों की फिर आंसू बहाने लग गयी
रौशनी मांगी थी मैंने शहर भर के वास्ते
और ये बस्ती मेरा ही घर जलाने लग गयी.
आज कल दिल्ली में बस इतना ही खास है। शीशमहल खुश है, मफलर उदास है। 0
डॉ सुरेश अवस्थी, कानपुर
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देंह चढ़ें,मन पर नहीं,कच्चे हैं सब रंग
लाल,हरा,पीला नहीं,पक्का नेह का रंग
डॉ श्लेष गौतम
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होली मे होती है रंगो की बौछार रसिया।
मिल खेलो रंग होली का त्योहार रसिया।।
वंदना शुक्ला
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रंग होली का हो या तेरे प्यार का
प्यार से संवरता ये त्योहार है
प्यार के रंग में रंग दे सांवरिया
प्यार का रंग होली का त्योहार है
मिस्बाह इलाहाबादी
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होली में खूब ठिठोली करो,
पर प्रेम के बोल ही बोलना प्यारे।
जिस रंग से भंग पड़े घर में,
उस रंग को ना कभी घोलना प्यारे।
भाभी के गाल पे रंग लगे,
औ पड़ोसन को नहीं छोड़ना प्यारे।
पर याद रहै इतना तुमको,
कभी लाज के बंद न खोलना प्यारे।
*डाॅ धर्मप्रकाश मिश्र, वाराणसी
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कुम्भ के मेले में भैया ने कर लीं आँखें चार।
भाँग पिए अब ढूढ़ रहे मोनालिसा का प्यार।।
जोगीरा सारा रारा रा
धनञ्जय शाश्वत प्रयागराज
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इसके अतिरिक्त अखिलेश द्विवेदी की रचनाओं पर लोगों ने खूब ठहाके लगाते।
कार्यक्रम में श्रोताओं की भरी-पूरी भागीदारी रही।।
