कटरा दुर्गा पूजा का पांडाल दिव्याता भव्यता और दिव्यता का कराएगा अहसास,ढाक का पंडाल में विराजेगी माँ दुर्गा

प्रयागराज. श्री कटरा दुर्गा पूजा बारवारी का पंडाल इस बार ढाक से बनाया जा रहा है। 106 वर्षों पुरानी पूजा के पंडाल को भव्यता देने के लिए कोलकाता के मशहूर चंदन नगर गांव के कारीगरों द्वारा बीते स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के मौके पर भूमि पूजन कर तैयार किया जा रहा है। बारवारी के प्रधान सचिव अभिन्न वार्ष्णेय बताते हैं कि कोलकाता से सजावट का सारा सामान लाकर लगभग 20 कारीगर दिन – रात्रि जुट कर पंडाल बना रहे हैं। पिछले 18 दिनों के अथक प्रयास के बाद ढांचा तैयार किया गया है। वार्ष्णेय बताते हैं कि 10 से 12 दिनों में पंडाल की भव्यता देखते बनेगी । शहर की सबसे पुरानी पूजा में शुमार पंडाल और मां सहित अन्य प्रतिमाओं को इको- फ्रेंडली पर्यावरण के अनुकूल निर्माण की प्रक्रिया का पूरा ख्याल रखा गया है , ताकि पर्यावरण को कम नुकसान हो और प्रकृति के परिस्थितिकी तंत्र का नकारात्मक प्रभाव भी कम हो। बताया कि ढाक के पंडाल का मतलब एक ऐसे पूजा पंडाल से है जिसमें ढाक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है। ढाक बजते ही पंडाल में उत्सव का माहौल बन जाता है, जो पूजा को जीवंत बना देती है। कहा कि इस पंडाल को सजाने के लिए पलाश के पत्तों का इस्तेमाल किया गया है। यह भी बताया कि कटरा बारवारी प्रारंभ से ही शहर में भोग के लिए विख्यात है, सप्तमी, अष्टमी और नवमी के तीनों दिन लगभग 4-5 हजार भक्तगण पंडाल में भोग ग्रहण करते हैं।
