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श्री अन्नम प्रसादम का 5 वें वार्षिक उत्सव का हुआ आयोजन

श्री अन्नम प्रसादम का 5 वें वार्षिक उत्सव का हुआ आयोजन

 

प्रयागराज। वैष्णव आश्रम श्री निकेतन श्रृंग्वेरपुर में श्रंग्वेरपुर पीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायण जी महाराज के सानिध्य में विगत पांच वर्षों से चल रहे श्री अन्नम प्रसादम के पांच वर्ष पूर्ण होने पर विशेष कार्तिक मास अनुष्ठान का भव्य आयोजन आज श्रृंगवेरपुर धाम में। समारोह के मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डा गौतम चौधरी थे, जबकि समारोह की अध्यक्षता बनारस हिन्दू विश्वविधायलय के पूर्व कुलपति प्रो
गिरीश चंद्र त्रिपाठी थे।
श्री अन्नम प्रसादम का 5 वां वार्षिक उत्सव कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर मनाया गया. इस विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने न्याय संगत निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में सही को गलत और गलत को सही करने का प्रयास करना चाह रहे हैं उसे दूर करना है, न्याय के माप दंड स्थापित करना चाहिए, राजा दशरथ का आदेश था कि भगवान श्रीराम को वन जाना हैं और भरत को राजगद्दी मिलना चाहिए.आज कानून का पालन कैसे हो रहा हैं उसे देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को वन वास कर्म के आधार पर गए. श्रीराम ने न्याय की व्यवस्था करने के लिए वन जाना स्वीकार किया था।
न्यायमूर्ति डा गौतम चौधरी ने कहा कि भगवान श्रीराम से बड़ा नेता कोई नहीं हुआ, श्री राम ने कहा था कि मै ही शुरू करूंगा और मै ही अंत करूंगा,डॉ न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि सनातन धर्म सब धर्मों का बंधु है। उन्होंने कहा कि भारत माता की सही तस्वीर बनानी है,सभी देशों को लेकर चलना है.धर्म के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। उन्होंने कहा कि रामायण कोर्ड ऑफ कंडक्ट हैं,धर्म सिर्फ कर्तव्य बोध है.हिन्दी में 28 हजार जजमेंट दिया हैं हिन्दी मेरी माँ हैं, हिन्दी को बढ़ावा दीजिये.आप सभी अपनी संस्कृति से जुड़े रहें.
विशिष्ठ अतिथि विमल देव जी महाराज ने कहा कि श्रंग्वेरपुर पीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायण जी महाराज
वस्त्र दान प्रतिदिन करते हैं। राष्ट्रीय रामायण मेले के संयोजक उमेश द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए श्रृंग्वेरपुर के महात्म को बताया।विशिष्ट अतिथि बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ऋषियों की साधना के बीज आज भी मौजूद है. भारत एक भूखंड नहीं दर्शन दृष्टि और विचार है. इसका मूल सिद्धांत वसुधैव कुटुंबकम है.अच्छी बात कहीं हो किसी के पास हो उसका सम्मान करना चाहिए. हमारे पूर्वजों के दिए बीज नष्ट नहीं हुए हैं उसमें वीकृति आई है उसका हमें ध्यान देना है और उसे दूर करने का प्रयास करना है.। विशिष्ठ अतिथि रामलीला कमेटी महासंघ के अध्यक्ष दुर्गेश दुबे ने कहा कि अन्नम प्रसादम का हम छोटा सा हिस्सा बन पा रहे हैं यह हमारा सौभाग्य है। जगदगुरु शांडिल्य जी महाराज ने मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डा गौतम चौधरी सहित सभी अतिथियों को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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