सांस्कृतिक
त्रिदिवसीय रामलीला महोत्सव 2025 का संपन्न

उजाला शिखर
आदर्श लोककला समिति, गोहरी, प्रयागराज द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय रामलीला महोत्सव सम्पन्न हुआ। अंतिम सांस्कृतिक संस्था इण्डियन फोक एण्ड माडर्न आर्ट अकादमी, प्रयागराज की प्रस्तुति “सीता हरण” प्रसंग का मंचन रंगकर्मी रमेश कश्यप द्वारा किया गया। कल द्वितीय दिवस पर आदर्श रामलीला समिति, द्वारा “कैकेयी वरदान” की प्रस्तुति की गयी थी। चतुर्थ रामलीला महोत्सव 2025 की परिकल्पना व निर्देशन युवा रंगकर्मी कुंवर तेजभानु सिंह “प्रिंस” ने किया। जबकि सह निर्देशन कुंवर करन सिंह व देवेन्द्र सिंह का था। रामलीला महोत्सव का मुख्य आकर्षण मानस की चैपाइयों पर आधारित पारंपरिक रामलीला की राधेश्यामी शैली पर आधारित प्रस्तुतियां रही। जिसमें अभिनेता अपने संवादों को स्वर-लयबद्ध करके गाते हैं। पारम्परिक राधेश्यामी धुन हमारे दशहरा मेलों की जान रही है। इन धुनों पर आधारित गाने दशहरा मेलों में खूब बजते थे। आधुनिकता के कारण रामलीलाओं का स्वरुप समय के साथ बदलता गया। इसमें पारम्परिक धुनों के स्थान पर पहले से रिकार्डेड संवाद बजने लगे, जिस पर अभिनेता केवल अपनी भाव-भंगिमाओं को ही मंच पर प्रस्तुत करते हैं। राधेश्यामी रामलीला की परम्परिकता में जो लोक जनमानस की मिठास छुपी थी। इस रामलीला महोत्सव में इसी परम्परा को मंचीय आधुनिकता का समावेश करते हुआ पुनः जागृत करने का प्रयास किया गया।
मंच पर जिन कालाकारों ने अभिनय किया उनमें- कुंवर करन सिंह (राम), देवेन्द्र सिंह (लक्ष्मण), जाहनवी पाण्डेय(सीता), मोती चन्द पाण्डेय, दूधनाथ विष्वकर्मा, देवी चरण पाण्डेय, इन्द्रजीत सिंह, मिथिलेश यादव, हेमा बानो, ओम प्रकाश सिंह, जीतेन्द्र सिंह, शिवेन्द्र वैश्य, युवराज सिंह, रवि कुमार पटेल, अस्मिता तिवारी, अपराजिता तिवारी, रिया दिवाकर, शिवानी दुबे, कृति सिंह, आख्या चित्रांशी, विपिन सिंह, अनुज सिंह, समर्थ जायसवाल, अखिलेश पाल, सूरज विश्वकर्मा, निशि कुमारी, सृष्टि गुप्ता, तेजस्वी सिंह, अनाया सिंह, आयुशी श्रीवास्तव, कुमकुम कुमारी, आदित्य पाण्डेय, नैतिक पाण्डेय आदि।
वहीँ मंच परे पार्श्व गायन शरद राज, सुधा सिंह, मान्य, कृति, शिल्पी, शिवानी. अक्षय प्रताप सिंह (ढोलक), आकांक्षा मिश्रा (की-बोर्ड), आशुतोष मिश्रा (तबला) प्रकाश संयोजन (धीरज कुमार), मोहम्मद हामिद अंसारी (रूप सज्जा)] फोटोग्राफी और विडियोग्राफी अमित विश्वकर्मा.
