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आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग – डॉ जी एस तोमर

आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग – डॉ जी एस तोमर

हण्डिया, प्रयागराज: श्री लाल बहादुर शास्त्री स्मारक राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय हण्डिया, प्रयागराज में एनसीआईएसएम द्वारा निर्धारित पन्द्रह दिवसीय आयुर्प्रवेशिका (ट्रांसिशनल करीकुलम) कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्रधानाचार्य डॉ केदार नाथ उपाध्याय ने की । विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) जी एस तोमर मुख्यअतिथि के रूप में इस अवसर पर उपस्थित रहे । सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज मिर्जापुर के पूर्व प्रोफेसर डॉ सी एम पाण्डेय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई । अपने उद्बोधन में डॉ तोमर ने नवप्रवेशित छात्रों को बधाई दी । वर्तमान परिदृश्य में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग है । विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति होने के साथ-साथ यह एक आदर्श जीवन दर्शन है । समय सिद्ध औषधियों के साथ-साथ इसमें बताई जीवनशैली आज सम्पूर्ण विश्व के आकर्षण का केंद्र बन गई है । कोरोना कालखंड के परिणामों ने आयुर्वेद की प्रमाणिकता सिद्ध कर इसे और अधिक लोकप्रिय बना दिया है । आप्तोपदेश, प्रत्यक्ष, अनुमान एवं युक्ति नामक चार प्रमाणों से सिद्ध यह ज्ञान त्रिकाल सिद्ध है । साक्ष्य आधारित शोध की आवश्यकता को पूर्ण करने की दिशा में आज आयुर्वेद में पब्लिक डोमेन में 90 हज़ार से अधिक प्रकाशित शोध पत्र उपलब्ध हैं । डॉ तोमर ने पैंतालीस वर्षों से अधिक के अपने चिकित्सा एवं शोध अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि आयुर्वेद न केवल विकृत जीवनशैली जन्य रोगों में अत्यंत प्रभावी है अपितु यह केंसर, गठिया, दमा जैसे जीर्ण एवं दुश्चिकित्स्य रोगों के लिए भी संजीवनी है । विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में डॉ सी एम पाण्डेय ने बताया कि आयुर्वेद हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है । इसकी कार्मुकता समय सिद्ध है तथापि इसे साक्ष्य आधारित शोध से संपुष्ट करना आज की महती आवश्यकता है । अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ उपाध्याय ने नवप्रवेशित छात्रों के इस आशीर्वाद समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होने के लिए डॉ तोमर का एवं डॉ पाण्डेय का आभार जताया । इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ सामू प्रसाद पाल ने संस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ साथ महाविद्यालय की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी साझा की । समारोह में डॉ राकेश कुमार, डॉ अवनीश पाण्डेय, डॉ अरुण सिंह, डॉ महापात्रा, डॉ बीरबल राम, डॉ डॉ शिप्रा,डॉ निरंजन, डॉ अजय, डॉ परवेज़ एवं डॉ गंगाप्रसाद सहित सभी प्राध्यापक एवं चिकित्साधिकारी एवं समस्त छात्र छात्राएँ उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन डॉ सुषमा तिवारी ने किया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ तोमर ने नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं को चरक शपथ भी दिलाई ।धन्यवाद ज्ञापन डॉ सोनकर ने किया एवं समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ ।

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