चंद्रग्रहण का समय, फल और नुकसान
दिनेश तिवारी
आचार्य विश्वपति शुक्ल जी साक्षात्कार में चंद्रग्रहण लगने के विषय पर विस्तार से बताया कि चंद्रग्रहण फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 ई.को है।
*ग्रहण का पूरा समय*
दिन में 3:19 बजे से प्रारंभ होकर सायंकाल 6:47 बजे तक। अर्थात् 3 घंटे 28 मिनट होगा।
*अपने यहां ग्रहण का समय*
ग्रहण का प्रारंभ और मध्य यहां नहीं दिखाई पड़ेगा क्योंकि उस समय चंद्रोदय ही नहीं हुआ रहेगा यहां चंद्रोदय का काल सायं 5:59 बजे है अतः अपने यहां ग्रहण सायंकाल 5:59 बजे से ही चंद्रोदय के साथ ही दिखाई पड़ेगा अतः अपने यहां ग्रहण का काल सायंकाल 5:59 से 6:47 तक अर्थात् मात्र 48 मिनट दृश्य होगा।जब यहां ग्रहण नहीं होता तब कोई सूतक भी नहीं माना जाता इसलिए जिस समय यहां ग्रहण नहीं है उस समय को सूतक में भी जोड़ना युक्ति संगत नहीं है। जब से दिखाई पड़ेगा उससे 9 घंटे पूर्व से सूतक भी मानना चाहिए।
*अपने यहां ग्रहण का सूतक*
यहां ग्रहणकाल सायं 5:59 से 9 घंटे पूर्व प्रातःकाल 8:59 बजे से ग्रहण का सूतक मानना चाहिए।
*विशेष*
इसमें विशेष यह है कि जहां और पहले ग्रहण दिखाई पड़ेगा वहां उसी समय से ग्रहण माना जाएगा और उससे 9 घंटे पूर्व ग्रहण का सूतक रहेगा।
*ग्रहणकाल में क्या न करें*
ग्रहण काल में देव मूर्तियों का स्पर्श न करें,अन्न जल का ग्रहण करना अर्थात् भोजन पानी अथवा कुछ भी खाना पीना वर्जित है,ग्रहण के समय शयन करना, मैथुन करना, मनोरंजन करना, घूमना फिरना, अधिक बोलना, मल मूत्र का त्याग करना, थूकना, यात्रा इत्यादि कार्य वर्जित हैं।
*ग्रहण में क्या करें*
अपने इष्ट मंत्र का गुरू मंत्र का जप करें, भगवान का ध्यान करें जलाशय में मंत्र सिद्धि करें,साधना करें, दान करें, श्रीहरि की कथाओं का स्मरण करें।
**सूतक में क्या करें-क्या न करें*
ग्रहण के सूतक काल से ही अन्नादि का निषेध है, देवमूर्तियों का स्पर्श वर्जित है, मानसिक सन्ध्या की जा सकती है, संभव हो तो यात्रा से बचें, सूतक में मंत्र जाप भी न करें, शान्त चित्त रहें, क्रोधादिक न करें, सूतक में भी सहवासादि वर्जित है। प्राण रक्षार्थ फल,दूध, मेवा इत्यादि ग्रहण कर सकते हैं।
*किसको ग्रहण मानने की आवश्यकता नहीं है*
बालक अर्थात् अधिकतर 5 या 8 वर्ष की आयु तक या वृद्ध जो नियम पालन में सक्षम न हों तथा रोगी को ग्रहण के नियमों में छूट है ।
*गर्भवती महिलाएं क्या करें*
गर्भवती महिलाएं कोख में गेरू या गाय का गोबर लगा लें, टेंट में दूर्वा खोंश लें, शयन न करें,भगवान का स्मरण करें।
*खाद्य पेय पदार्थ का संरक्षण कैसे करें*
ग्रहण सूतक से पूर्व से ग्रहण के अंत तक सभी खाद्य और पेय पदार्थ में कुश या दूर्वा डालें तभी वह पदार्थ खाने पीने योग्य बचेगा अन्यथा बिना कुशादि डाले पदार्थ का भक्षण करना रोग व्याधि को जन्म देता है।
*ग्रहण दोष की शांति*
जिसकी कुंडली में ग्रहण योग है उसे ग्रहण काल में उसकी शांति और दान करना चाहिए।जिनकी राशि में ग्रहण अशुभ हो उनको ग्रहण नहीं देखना चाहिए।
*ग्रहणफल*
मिथुन, तुला, वृश्चिक, मीन राशि के जातकों को यह ग्रहण शुभ है जबकि मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर, कुंभ के लिए यह अशुभ फल प्रदायक है।जिनके लिए अशुभ है वे मंत्र जप करें, ग्रहण न देखें, दान करें।
